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कांग्रेस ने मुझे 2 करोड़ रुपए में ख़रीदने की कोशिश की- प्रह्लाद लोधी

बीजेपी विधायक प्रहलाद लोधी की तरह इनकी विधायकी भी खतरे में है
बीजेपी विधायक प्रहलाद लोधी की तरह इनकी विधायकी भी खतरे में है

प्रह्लाद लोधी (prahlad lodhi) की याचिका पर सुनवाई के दौरान अदालत में नवजोत सिंह सिद्धू (navjot singh siddhu) सहित अन्य फैसलों का भी हवाला दिया गया. जिसे सुनने के बाद अदालत ने भोपाल के स्पेशल कोर्ट के आदेश पर 7 जनवरी तक रोक लगा दी है

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जबलपुर. अदालत का फैसला आने के बाद प्रह्लाद लोधी ने कांग्रेस पर आरोप लगाया. लोधी ने कहा कांग्रेस ने उन्हें 2 करोड़ रुपए में ख़रीदने की कोशिश की. प्रह्लाद लोधी (prahlad lodhi) की सज़ा पर जबलपुर हाई कोर्ट (jabalpur high court) ने 7 जनवरी तक रोक लगा दी है. अदालत के फैसले के बाद लोधी ने आभार जताया औऱ कहा मुझे अदालत पर पूरा भरोसा था, मुझे इंसाफ मिला. विधायकों के संरक्षक विधानसभा अध्यक्ष (vidhan sabha speaker) ने मेरे साथ अन्याय किया था.

अदालत पर था भरोसा
जबलपुर हाईकोर्ट का फैसला आने के बाद प्रह्लाद लोधी ने न्यूज18 से बात की. उन्होंने कहा,मुझे न्यायपालिका पर पूरा भरोसा था और न्याय मिला भी. भोपाल स्पेशल कोर्ट से सजा़ मिलने के बाद तत्काल ज़मानत का लाभ भी मिल गया था और फैसले पर अपील के लिए 12 दिसंबर तक का समय दिया गया था. लेकिन आनन-फानन में उनकी सदस्यता निरस्त कर दी गई.
निशाने पर विधानसभा अध्यक्ष
विधानसभा अध्यक्ष पर निशाना साधते हुए लोधी ने कहा, यह उनके साथ अन्याय था. जहां से कानून बनता है वहां से उन्हें अन्याय मिला. विधानसभा अध्यक्ष विधायकों के संरक्षक होते हैं लेकिन नर्मदा प्रसाद प्रजापति ने उनके साथ संरक्षक की भूमिका नहीं निभाई और पार्टी के दबाव में यह फैसला ले लिया.
तहसीलदार से मारपीट 


जबलपुर हाईकोर्ट ने लोधी के अंतरिम आवेदन पर सुरक्षित रखा फैसला सुनाते हुए भोपाल स्पेशल कोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी है. भोपाल कोर्ट ने लोधी को 2014 में एक तहसीलदार से मारपीट के मामले में 2 साल की सज़ा सुनाई थी. हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि भोपाल स्पेशल कोर्ट के आदेश पर यह रोक 7 जनवरी 2020 तक बरकरार रहेगी. जब तक उनकी अपील पर सुनवाई नहीं हो जाती.
जल्दबाज़ी की दलील
सुनवाई के दौरान यह दलील भी दी गई थी की भोपाल स्पेशल कोर्ट द्वारा दिए गए फैसले के बाद मध्यप्रदेश विधानसभा अध्यक्ष समेत शासन की ओर से सदस्यता निरस्तगी में जल्दबाजी की गई. ये संविधान के अनुच्छेद 192 के तहत विधिक प्रावधानों के खिलाफ है. इस कानून के तहत किसी भी विधानसभा सीट को खाली करने से पहले गवर्नर के पास पूरे मामले को ले जाना होता है. लेकिन यहां विधानसभा अध्यक्ष ने आनन-फानन में विधायक प्रह्लाद लोधी की सदस्यता निरस्त कर दी, जो पूर्ण रूप से न्याय संगत नहीं था.
अपील या आवेदन की ज़रूरत नहीं
प्रह्लाद लोधी की याचिका पर सुनवाई के दौरान अदालत में नवजोत सिंह सिद्धू सहित अन्य फैसलों का भी हवाला दिया गया. जिसे सुनने के बाद अदालत ने भोपाल के स्पेशल कोर्ट के आदेश पर 7 जनवरी तक रोक लगा दी है. अगली सुनवाई 7 जनवरी को होना है. कोर्ट ने भी इस बात को माना कि विधायक की सदस्यता निरस्त करने में जल्दबाज़ी की गई. विधायक लोधी की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता आर एन सिंह ने स्पष्ट किया कि हाईकोर्ट का फैसला आ जाने के बाद विधानसभा अध्यक्ष का दिया गया सदस्यता निरस्तगी का आदेश अपने आप ही रद्द हो जाता है. अब विधायक लोधी को कहीं अपील या आवेदन करने की भी ज़रूरत नहीं है. वह इस फैसले की कॉपी को सीधे निर्वाचन आयोग या फिर विधानसभा अध्यक्ष के पटल पर पेश कर सकते हैं.

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