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प्रह्लाद लोधी केस : सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की मध्य प्रदेश सरकार की याचिका

Prateek Mohan Awasthi | News18 Madhya Pradesh
Updated: December 6, 2019, 12:30 PM IST
प्रह्लाद लोधी केस  : सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की मध्य प्रदेश सरकार की याचिका
प्रह्लाद लोधी केस-सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार की याचिका खारिज की

पवई विधानसभा सीट (assembly seat) से जीते बीजेपी के प्रह्लाद लोधी (prahlad lodhi) को भोपाल की विशेष अदालत ने 2014 में एक तहसीलदार से मारपीट के मामले में 2 साल की सज़ा सुनायी थी. उसके बाद विधानसभा अध्यक्ष ने उनकी सदस्यता शून्य घोषित कर दी थी. लोधी विशेष कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ जबलपुर हाईकोर्ट गए थे.

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जबलपुर. पवई (pawai) विधानसभा सीट से चुने गए बीजेपी के प्रह्लाद लोधी (prahlad lodhi) मामले में मध्य प्रदेश सरकार (madhya pradesh government) को बड़ा झटका लगा है. सुप्रीम कोर्ट (supreme court) ने प्रदेश सरकार की याचिका खारिज कर दी है. सुप्रीम कोर्ट ने जबलपुर हाईकोर्ट (HC) के आदेश को सही ठहराया है.हाई कोर्ट ने विधायक प्रह्लाद लोधी की सज़ा पर 7 जनवरी तक  लगायी थी. हाईकोर्ट के इस फैसले को मध्य प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी.

2018 के विधानसभा चुनाव में पवई सीट से चुनाव जीते बीजेपी के प्रह्लाद लोधी को भोपाल की विशेष अदालत ने 2 साल की सज़ा सुनायी थी. HC ने अपने फैसले में लोधी की सज़ा पर 7 जनवरी 2020 तक रोक लगा दी थी. इसी दिन इस केस की अगली सुनवाई होना है. भोपाल ज़िला अदालत के फ़ैसले के बाद विधानसभा अध्यक्ष ने प्रह्लाद लोधी की सदस्यता निरस्त कर दी थी. उनका विधानसभा का अकाउंट भी ब्लॉक कर दिया था.

उसके बाद प्रह्लाद लोधी (bjp mla prahlad lodhi) की विधायकी का मामला पहले हाईकोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट (supreme court) तक पहुंच गया. एमपी सरकार ने एडवोकेट जनरल की ओर से सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दायर की थी. इसमें प्रह्लाद लोधी की सज़ा पर हाईकोर्ट (high court) का स्टे हटाने की अपील की गयी थी. बीजेपी (bjp) ने भी प्रह्लाद लोधी की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में कैविएट दायर की थी, ताकि उनका पक्ष भी सुना जाए.

ये है मामला

बीजेपी के पवई से जीते प्रह्लाद लोधी को भोपाल की विशेष अदालत ने 2014 में एक तहसीलदार से मारपीट के मामले में 2 साल की सज़ा सुनायी थी. जनप्रतिनिधित्व कानून के तहत ऐसे जनप्रतिनिधि का निर्वाचन शून्य माना जाता है.  विधानसभा अध्यक्ष ने उनकी सदस्यता शून्य घोषित कर दी थी.हालांकि लोधी को इस मामले में जमानत मिल गई और फैसले के खिलाफ अपील करने के लिए 12 दिसम्बर तक का समय दिया गया था.लोधी विशेष कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ जबलपुर हाईकोर्ट गए थे. हाईकोर्ट ने प्रह्लाद लोधी की सज़ा पर 7 जनवरी 2020 तक स्टे दिया. सज़ा पर स्टे मिलने के बाद लोधी की विधायकी को लेकर कांग्रेस-बीजेपी दोनों में लगातार टकराहट चल रही है. कांग्रेस ने हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी. इसमें प्रह्लाद लोधी की सज़ा पर हाईकोर्ट का स्टे हटाने का आग्रह किया गया था.

तिलमिलाई बीजेपी
प्रह्लाद लोधी की सदस्यता ख़त्म होने से तिलमिलाई बीजेपी लगातार विधानसभा अध्यक्ष की भूमिका पर सवाल उठा रही है. पार्टी ने इस मसले पर राज्यपाल से दखल देने की मांग भी की थी. बाद में उसने भी सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और कैविएट दायर की.पार्टी का कहना था कि प्रह्लाद लोधी अब भी विधायक हैं और कैविएट इसलिए दायर किया गया है कि कोर्ट में उनका भी पक्ष सुना जाए.ये भी पढ़ें-एमपी ई कॉप ऐप लॉन्च : मध्यप्रदेश पुलिस ने किया हर तरह की सुरक्षा का वादा

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First published: December 6, 2019, 12:15 PM IST
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