जबलपुर में स्ट्रीट वेंडर्स को आत्मनिर्भर बनाने में बाधा बन रहे निजी बैंक!

जबलपुर में स्ट्रीट वेंडर्स के आवेदन को निजी बैंक स्वीकार नहीं कर रहे हैं.
जबलपुर में स्ट्रीट वेंडर्स के आवेदन को निजी बैंक स्वीकार नहीं कर रहे हैं.

प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर निधि योजना के अंतर्गत जबलपुर (Jabalpur) जिले में 5000 हितग्राहियों के आवेदन पर किसी भी निजी बैंक में अब तक मुहर नहीं लगाई है.

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जबलपुर. सड़क किनारे ठेलो में व्यापार करने वाले स्ट्रीट वेंडरों को आत्मनिर्भर बनाने में निजी बैंकों का सहयोग नहीं मिल पा रहा है. यही वजह है कि प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर निधि योजना के अंतर्गत जबलपुर (Jabalpur) जिले में 5000 हितग्राहियों के आवेदन पर किसी भी निजी बैंक में अब तक मुहर नहीं लगाई है. बीते 9 सितंबर को देश भर में एक लाख स्ट्रीट वेंडरों को 10 हजार की ऋण राशि देने की योजना का खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुभारंभ किया था.

प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर निधि योजना के अंतर्गत कोरोना संकटकाल के चलते अपने जीवन यापन और समस्याओं की जकड़ में फंसे स्ट्रीट वेंडरो को सहायता पहुंचाने के मकसद से योजना लागू की गई थी. बात जबलपुर जिले की करें तो प्रथम चरण में करीब 27 हजार लाभार्थियों को योजना का लाभ देने का लक्ष्य रखा गया था लेकिन निजी बैंकों का रवैया प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महती योजना को पलीता सा लगा रहा है. आलम यह है कि कोई भी निजी बैंक योजना के अंतर्गत स्वीकृत प्रकरणों में 10000 का ऋण देने तैयार नहीं है.

इन्होंने लगाई मुहर
राष्ट्रीयकृत  बैंकों ने अब तक करीब 10000 हितग्राहियों के आवेदन पर मुहर लगाई है और राशि उनके खाते पर पहुंच गई है, लेकिन निजी बैंक इस योजना के अंतर्गत सहयोग करने में आगे पीछे हो रहे हैं. आरोप लगाए जा रहे हैं कि निजी बैंकों में खाता रखने वाले स्ट्रीट वेंडरो की परेशानी यह है कि बैंक आए दिन दस्तावेजों को लेकर उनके प्रकरण को लटका रहे हैं और नई-नई बहाने बाजी कर रहे हैं.
नोडल एजेंसी भी परेशान


योजना के क्रियान्वयन के लिए नोडल एजेंसी बनी नगर निगम जबलपुर भी निजी बैंकों के इस रवैया से बेहद परेशान हैं. योजना प्रभारी और उपायुक्त ने बताया कि जबलपुर के निजी बैंकों के पास करीब 5 हजार आवेदन भेजे गए थे, जिन्हें अब तक स्वीकृत नहीं किया गया है. निजी बैंकों का असहयोग इस योजना के बेहतर क्रियान्वयन में कहीं ना कहीं बाधा बन रहा है. इस सिलसिले में नगर निगम द्वारा जिले के कलेक्टर को सूचित किया गया है जो संभावित रूप से इन पर कार्रवाई कर सकते हैं.
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