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पुलवामा आतंकी हमला : जबलपुर के इस घर में अब भगवान नहीं, शहीद अश्विनी काछी पूजे जाते हैं...

पुलवामा आतंकी हमला- जबलपुर के इस घर में अब शहीद अश्विनी काछी पूजे जाते हैं...

पुलवामा आतंकी हमला- जबलपुर के इस घर में अब शहीद अश्विनी काछी पूजे जाते हैं...

घर की बच्चियों ने शहीद अश्विनी की याद मे इस मंदिर में वो तमाम चीजे़ सहेज कर रखी हैं जिनसे अश्विनी की यादें जुड़ी थीं. शहीद अश्विनी की वर्दी और जिस तिरंगे में लिपटकर उनका पार्थिव शरीर खुड़ावल आया था, वो भी मंदिर में रखा है

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जबलपुर.पुलवामा (pulwama) में CRPF जवानों पर हुए आतंकी हमले की आज पहली बरसी है. जवानों के काफिले पर किए गए  हमले में 45 जवान शहीद हो गए थे. उनमें जबलपुर (jabalpur) के खुडावल गांव का एक लाल अश्विनी काछी (ashwini kachhi) भी शामिल था. अश्विनी अमर हैं. अब वो माता-पिता की आंखों में नज़र आते हैं और मंदिर की पूजा में बोलते हैं.

14 फरवरी 2019 की वो काली तरीख भुले ना भुलायी जा सकेगी. जम्मू कश्मीर राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित पुलवामा में CRPF जवानों को लेकर जा रही बस पर फिदायीन हमला किया गया था. उस हमले में 45 जवान शहीद हो गए थे. देश को झंकझोर देने वाले उस हमले में मध्यप्रदेश के जबलपुर के खुडावल गांव का भी एक वीर सपूत अश्विनी काछी शहीद हो गया था.

पिता को आज भी है अश्विनी का इंतज़ार
अश्विनी के पिता के मुताबिक सेना में भर्ती होने के लिए वो कड़ी मेहनत करता था. एक बार वो मेडिकल फिटनेस टेस्ट में फेल हो गया था. एक पल ऐसा भी आया जब अश्विनी हिम्मत हार गया था. लेकिन उन्होंने अश्विनी को कभी न हारने की सलाह दी. नतीजा ये हुआ कि 2017 में वह सेना में भर्ती हो गया. पिता कहते हैं उनका बेटा भले ही उनसे बिछड़ गया लेकिन वो जो इज्जत दे गया वो कोई और नहीं दे सकता. शहीद अश्विनी के पिता सुकरू काछी कहते हैं अश्विनी के जाने की चोट का घाव कभी नहीं भर सकता. लेकिन उन्हें इस बात का संतोष है कि सरकार ने अश्विनी की शहादत का सही बदला आतंकवादियों से लिया.

मंदिर में अश्विनी की पूजा
अश्विनी के घर में अब एक छोटा सा मंदिर है. वहां भगवान नहीं विराजे बल्कि खुद अश्विनी इस मंदिर में पूजे जाते हैं. घर की बच्चियों ने शहीद अश्विनी की याद मे इस मंदिर में वो तमाम चीजे़ सहेज कर रखी हैं जिनसे अश्विनी की यादें जुड़ी थीं. शहीद अश्विनी की वर्दी और जिस तिरंगे में लिपटकर उनका पार्थिव शरीर खुड़ावल आया था, वो भी मंदिर में रखा है.

खुडावल गांव यानि शहीदों की धरती
आतंकी हमले में शहीद हुए अश्विनी काछी खुड़ावल गांव के तीसरे वीर सपूत थे जिन्होंने देश के लिए अपनी शहादत दी. इस गांव का इतिहास गौरवांवित करने वाला है. यहां हर दसवें घर का एक नौजवान सेना में है. 3000 की आबादी वाले इस छोटे से गांव से अब तक 3 जवान देश के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर चुके हैं और 30 जवान अभी फौज में हैं. अब तक 100 से ज्यादा जवान सेना में रह चुके हैं. अश्विनी के जाने के पहले इसी गांव के दो और जवान शहीद हो चुके है.2016 में रामेश्वर लाल जम्मू कश्मीर के कुपवाड़ा में शहीद हुए थे.उससे पहले 2006 में राजेन्द्र प्रसाद बालाघाट में नक्सली मुठभेड़ के दौरान वीर गति को प्राप्त हुए थे.

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