मजहब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना, रोजेदारों ने ईद पर बांटीं खुशियां...
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मजहब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना, रोजेदारों ने ईद पर बांटीं खुशियां...
रोजेदारों ने ईद पर प्रवासी श्रमिकों को बांटी सेवईं

भोपाल में 122 साल में पहली बार ईदगाह में ईद की सामूहिक नमाज़ नहींं पढ़ी गयी. लेकिन ईद तो खुशियां बांटने का त्योहार है. किसी ने प्रवासी श्रमिकों (migrant labours) को सेवईं बांटी तो किसी ने अपने शहर से गुजर रही ट्रेन में यात्रियों को खाने के पैकेट दिए.

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भोपाल/जबलपुर. ईद (EID) पर इस बार अलग नज़ारा दिखा. मस्जिदों में सन्नाटा रहा. ईदगाह पर सामूहिक नमाज़ अदा नहीं की गयी. लोगों घरों पर अपनों के साथ नमाज़ (Namaz) पढ़ी, लेकिन ईद तो खुशियां बांटने का त्योहार है. किसी ने प्रवासी श्रमिकों (migrant labours) को सेवईं बांटी तो किसी ने अपने शहर से गुजर रही ट्रेन में यात्रियों को खाने के पैकेट दिए.

भोपाल में 122 साल में पहली बार ईदगाह में ईद की सामूहिक नमाज़ नहींं पढ़ी गयी. न ही रमज़ान माह कभी इतना सूना गुजरा. न बाजारों में रौनक न त्यौहार पर कोई ख़ुशी. मगर इस कठिन समय मे भी रोजेदारों ने अल्लाह से दुआ में सबकी खैरियत मांगी. ईद की नमाज़ के बाद भोपाल के कुछ युवा मुस्लिम साथी निकल पड़े स्टेशन की ओर. उन्होंने ट्रेनोंं में सफर कर रहे भूखे प्यासे यात्रियों को ईद के पकवान बांटे. इसमें सेवईं की खीर और खाने के पैकेट थे. इन लोगों ने छोटे बच्चों को ईदी भी दी. इनका कहना था कि हम सिर्फ सुबह से लेकर शाम तक रोजा रखते थे. मगर यह मजदूर भूखे-प्यासे हजारों किलोमीटर का सफर पैदल तय कर अपने घर लौट रहे हैं. इंसानियत और मानवता ही सबसे बड़ा मजहब है.

ईद का तोहफा



मजहब ए इस्लाम में कहा जाता है कि रमजान के रोजे रखने के बाद खुदा की तरफ से ईद उनके लिए तोहफा होती है. इस दिन को खुशी के साथ मनाया जाता है. लोग अपने घरों पर रहते हैं. एक दूसरे से गले मिलते हैं और ईद की मुबारकबाद देते हैं.सिवईयां खाते हैं. ये रोजेदार एक महीने से हाइवे पर श्रमिकों को खाना खिला रहे थे. पानी पिला रहे थे. अब ट्रेन चलने लगी तो ट्रेन में मौजूद श्रमिकों को पिछले कुछ दिनों से खाने, बिस्कुट और पानी के पाउच बांट रहे हैं. हम अपनी इस ख़िदमत के ज़रिए पैगाम देना चाहते हैं कि पूरे मुल्क में अमन और भाईचारे का माहौल हो हर इंसान इंसानियत की खिदमत करे. जल्द से जल्द कोरोना हिंदुस्तान से चला जाए.



श्रमिकों को खिलायी सेंवई
जबलपुर में हिन्दू मुस्लिम भाइयों ने मिलकर एनएच 7 पर गरीब ओर बेबस प्रवासी श्रमिकों को लजीज सेंवई खिलाई और ईद की दिली मुबारकबाद दी. गंगा जमुनी तहजीब का परिचय देते हुए हिन्दू मुस्लिम भाईयों ने बकायदा मजदूरों को बैठाकर उन्हे सेंवई परोसी. लॉकडाउन में प्रवासी मजदूरों का अपने गंतव्य स्थान तक जाने का सिलसिला जारी है. नौतपा की इस तेज तपिश में भी मजदूर बिना रुके मीलों का सफर तय कर रहे हैं. ऐसे में इन जायरीनों ने खुद को पीड़ित मानव्ता की सेवा में समर्पित किया.

60 दिन से सेवा
जबलपुर से गुजरने वाला एनएच 7 मध्यप्रदेश को भारत के उत्तर से दक्षिण की ओर जोड़ता है. राहगीरों का इस रास्ते पर खासा मूवमेंट रहता है. यहां इंदौर, नागपुर और आंध्रप्रदेश से मजदूर पहुंचते हैं.

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First published: May 25, 2020, 5:25 PM IST
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