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जबलपुर: आयुर्वेद कॉलेज बनाने में घोटाला, सवालों के घेरे में प्राचार्य और MP का ये निगम

Prateek Mohan Awasthi | News18 Madhya Pradesh
Updated: September 23, 2019, 6:51 PM IST
जबलपुर: आयुर्वेद कॉलेज बनाने में घोटाला, सवालों के घेरे में प्राचार्य और MP का ये निगम
कॉलेज भवन के निर्माण में हुई धांधली, नक्शे के आधार पर नहीं हुआ निर्माण

जबलपुर (Jabalpur) में आयुर्वेद कॉलेज के भवन (Ayurved College Building) का निर्माण बिना ऑडिटोरियम (Auditorium) के हुआ है. नक्शे और भुगतान में आडिटोरियम था लेकिन धरातल से गायब है. अब इस मामले में मध्यप्रदेश लघु उद्योग निगम इंदौर और महाविद्यालय के प्राचार्य की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं

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जबलपुर. किसी भी इमारत का निर्माण और लागत उसके ड्राइंग डिज़ाइन (Drawing & Design) के हिसाब से होता है, भवन यदि सरकारी हो तो उसमे और भी आवश्यक हिदायत बरती जाती है. लेकिन जबलपुर (Jabalpur) में आयुर्वेद (Ayurved) का पाठ पढ़ाने बने आयुर्वेद महाविद्यालय (Ayurved College) में इसी ड्राइंग डिज़ाइन के नाम पर डर्टी गेम खेला गया है. 2011 में जिस ड्राइंग डिज़ाइन को बनाकर भवन का टेंडर जारी हुआ, उस भवन का काम पूरा होते तक एक बड़ा ऑडिटोरियम अस्तित्व से गायब हो गया. इस पूरे मामले में मध्यप्रदेश लघु उद्योग निगम इंदौर और महाविद्यालय के प्राचार्य की भूमिका पर सवाल खड़े हो रहे हैं.

तय नक्शे के मुताबिक नहीं बना आयुर्वेद कॉलेज भवन
आयुर्वेद चिकित्सा को बढ़ावा देने प्रदेश सरकार द्वारा खोले गए आयुर्वेद महाविद्यालय में छात्र छात्राएं महाविद्यालीन सुविधाओं के आभाव में हैं. जबलपुर में दो साल पूर्व बनकर तैयार हुए आयुर्वेद महाविद्यालय की नींव कितनी मज़बूत है ये तो गुणवत्ता का प्रश्न है लेकिन इसकी बनावट तय नक्शे के मुकाबले अधूरी है. कॉलेज में 6 हजार स्क्वायर फीट में बनने वाले ऑडिटोरियम का धरातल पर नामोनिशान नहीं है. जबकि भवन के निर्माण के लिए स्वीकत हुई राशि में इसके निर्माण की राशि भी शामिल है.

News - इस नक्शे के आधार पर ही निर्माण किया गया
इस नक्शे के आधार पर ही कॉलेज भवन का निर्माण किया गया


ड्राइंग डिज़ाइन के नाम पर ऐसे खेला गया खेल
4 करोड़ 81 लाख रूपए की राशि से पूरे महाविद्यालय का निर्माण कार्य स्वीकृत हुआ. 2013 में अचानक महाविद्यालय की ड्राइंग डिज़ाइन में बदलाव के लिए पत्र लिखा गया, ये पत्र मध्यप्रदेश लघु उद्योग निगम इंदौर को लिखा गया जो महाविद्यालय भवन का निर्माण कर रहा था. ड्राइंग डिज़ाइन में बदलाव इस दर्जे का हो गया कि 6 हज़ार स्क्वेयफीट में बनने वाले ऑडिटोरियम का खर्चा करीब 1 करोड़ रूपए उस बदलाव में ही समाहित हो गया और ऑडिटोरियम बनाने के लिए बजट नहीं बचा.

खास बात ये है कि भवन की ड्राइंग डिज़ाइन को लेकर तमाम पत्राचार महाविद्यालय के प्रभारी प्राचार्य और मध्यप्रदेश लघु उद्योग निगम इंदौर के बीच किया गया जिसमे शासन से किसी भी पत्राचार का उल्लेख नही है. मामले में महाविद्यालय के प्रभारी प्राचार्य अपनी सफाई पेश कर रहे हैं. दरअसल ड्राइंग डिज़ाइन में बदलाव इन्हीं के प्रभार वाले समय में हुआ है. पूरे मामले की शिकायत आयुष मंत्री से हो जाने के बाद अब इनकी परेशानियां बढ़ती दिखाई दे रही हैं.
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संदेह के घेरे में इनकी भूमिका
इस पूरे मामले में महाविद्यालय प्रबंधन और मध्यप्रदेश लघु उद्योग निगम इंदौर के बीच ही भवन के ड्राइंग डिजाइन या फिर राशि को लेकर पत्राचार होता रहा. बिना शासन की अनुमति के भवन के ड्राइंग डिज़ाइन में बदलाव का प्रपंच रचा गया और बाद में उसके खर्च का भार ऑडिटोरियम पर लाद दिया गया. भवन का हैण्डओवर लेने से पहले जांच समिति ने इस बात का स्पष्ट खुलासा किया था कि ऑडिटोरियम का निर्माण नहीं किया गया है, जबकि स्वीकृत मानचित्र में वो शामिल था. अब पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग उठ रही है क्योंकि करोड़ों की राशि के घोटाले के संकेत मिल रहे हैं.

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First published: September 23, 2019, 5:09 PM IST
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