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मध्यप्रदेश में महिला कैदियों के लिए बनेंगी अलग से जेल! सरकार हाईकोर्ट में पेश करेगी जवाब ....

Gwalior : जेल में बंद गंभीर अपराध के सजायाफ्ता बंदियों को अपराध की प्रवृत्ति के हिसाब से पैरोल का लाभ दिया जाना चाहिए. क्योंकि इस पैरोल के लाभ का फायदा जेल में बंद उन कैदियों को भी मिल रहा है जिन्होंने मासूम बच्चियों के साथ दुष्कर्म किया है. गंभीर अपराध में जेल गए हैं. लिहाजा ऐसे अपराधियों को पैरोल का लाभ नहीं दिया जाना चाहिए.

Gwalior : जेल में बंद गंभीर अपराध के सजायाफ्ता बंदियों को अपराध की प्रवृत्ति के हिसाब से पैरोल का लाभ दिया जाना चाहिए. क्योंकि इस पैरोल के लाभ का फायदा जेल में बंद उन कैदियों को भी मिल रहा है जिन्होंने मासूम बच्चियों के साथ दुष्कर्म किया है. गंभीर अपराध में जेल गए हैं. लिहाजा ऐसे अपराधियों को पैरोल का लाभ नहीं दिया जाना चाहिए.

Gwalior : जेल में बंद गंभीर अपराध के सजायाफ्ता बंदियों को अपराध की प्रवृत्ति के हिसाब से पैरोल का लाभ दिया जाना चाहिए. क्योंकि इस पैरोल के लाभ का फायदा जेल में बंद उन कैदियों को भी मिल रहा है जिन्होंने मासूम बच्चियों के साथ दुष्कर्म किया है. गंभीर अपराध में जेल गए हैं. लिहाजा ऐसे अपराधियों को पैरोल का लाभ नहीं दिया जाना चाहिए.

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जबलपुर. मध्यप्रदेश (MP) में अब महिला कैदियों के लिए अलग से जेल (Jail) बनेगी. महामारी पैरोल पर छूटे कैदियों के मामले में दायर एक याचिका पर सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट में ये मुद्दा उठा. याचिकाकर्ता ने कहा अगर प्रदेश की जेलों में क्षमता से अधिक कैदी हैं तो सरकार को नई जेलों का निर्माण किया जाना चाहिए इसके साथ-साथ महिलाओं के लिए भी मध्यप्रदेश में अलग से जेल बनाए जाने चाहिए. हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता की दलीलों को सुनने के बाद सरकार से 25 अगस्त तक विस्तृत जवाब मांगा है.

कोरोना संक्रमण के कारण मध्य प्रदेश की जेलों से महामारी पैरोल पर छूटे कैदियों का मामला मध्यप्रदेश हाईकोर्ट पहुंचा था. बीते दिनों यह बात सामने आई थी कि रेप सहित पॉक्सो एक्ट के गंभीर अपराधियों को भी पैरोल का लाभ दिया गया. इसके बाद एक याचिका मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में दायर की गई थी.

27 अगस्त तक सरकार पेश करेगी अपना जवाब
कोरोना काल के दौरान मध्य प्रदेश की जेलों में बंद कैदियों को पैरोल पर छोड़े जाने के मुद्दे पर जबलपुर हाईकोर्ट में सरकार ने अपना जवाब पेश किया. सरकार की ओर से हाईकोर्ट को बताया गया कि जेल एक्ट में हुए संशोधन के मुताबिक केवल सजायाफ्ता और विचाराधीन कैदियों को पैरोल पर छोड़े जाने का प्रावधान है. इसके अलावा सरकार की ओर से पैरोल को लेकर और कोई भी बदलाव नहीं किया गया है. सरकार के इस जवाब पर याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि जेल में बंद गंभीर अपराध के सजायाफ्ता बंदियों को अपराध की प्रवृत्ति के हिसाब से पैरोल का लाभ दिया जाना चाहिए. क्योंकि इस पैरोल के लाभ का फायदा जेल में बंद उन कैदियों को भी मिल रहा है जिन्होंने मासूम बच्चियों के साथ दुष्कर्म किया है. गंभीर अपराध में जेल गए हैं. लिहाजा ऐसे अपराधियों को पैरोल का लाभ नहीं दिया जाना चाहिए.

25 अगस्त तक मांगा जवाब
इस मुद्दे पर याचिकाकर्ता की ओर से यह भी कहा गया कि अगर प्रदेश की जेलों में क्षमता से अधिक कैदी हैं तो सरकार को नई जेलों का निर्माण किया जाना चाहिए इसके साथ-साथ महिलाओं के लिए भी मध्यप्रदेश में अलग से जेल बनाए जाने चाहिए. हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता की दलीलों को सुनने के बाद सरकार से 25 अगस्त तक विस्तृत जवाब मांगा है.

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