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Sharda Mata Mandir: बस ड्राइवर ने सरकारी नौकरी छोड़कर पहाड़ पर बनवा दिया मंदिर

मां शारदा मंदिर में खूब भक्‍त आते हैं.

मां शारदा मंदिर में खूब भक्‍त आते हैं.

Sharda Mandir Jabalpur: जबलपुर में बरेला की पहाड़ियों पर मां शारदा का मंदिर है. इसे एक बस ड्राइवर ने बनवाया है. जानें म ...अधिक पढ़ें

रिपोर्ट- अभिषेक त्रिपाठी

जबलपुर. जब भी मां शारदा का जिक्र जेहन में आता है, तो मध्य प्रदेश के मैहर में ऊंचे पहाड़ों पर स्थित मां शारदा का मंदिर याद आता है. यह मंदिर दुनियाभर में प्रसिद्ध है. वहीं, आज हम आपको मां शारदा का वह मंदिर बताने जा रहे हैं जो मैहर में नहीं बल्कि जबलपुर में है. साथ ही महत्वपूर्ण बात यह है कि इस मंदिर को एक बस ड्राइवर ने बरेला की पहाड़ियों में बनवाया. इसके पीछे एक बड़ा ही रोचक किस्सा है.

संस्कारधानी जबलपुर में मंडला रोड पर ड्राइवर की नौकरी कर रहे श्रवण कुमार शुक्ला को एक रात सपना आया और उन्होंने बरेला के पहाड़ों पर मां शारदा का मंदिर बनवा दिया. जानकार बताते हैं कि कई साल पहले इस पहाड़ पर एक मढ़िया हुआ करती थी, जिसमें माता की प्रतिमा स्थापित थी. श्रवण कुमार शुक्ला राज्य सड़क परिवहन में बस ड्राइवर की नौकरी करते थे और वो जबलपुर से मंडला रोड पर बस चलाते थे. वह जब भी बस लेकर यहां गुजरते तो रुककर माता को प्रणाम जरूर किया करते थे. उसके बाद ही बस से आगे की यात्रा करते थे.

स्थानीय लोगों का कहना है कि एक बार मां शारदा बस चालक श्रवण शुक्ला के स्वप्न में आईं. इस दौरान उनको माता पहाड़ के ऊपर बने मढ़िया में लेटी हुई दिखाई दीं. कुछ दिन बाद बस ड्राइवर को दोबार मां शारदा का स्वप्न आया तो उन्होंने मंदिर बनाने का प्रण किया. हालांकि समस्या ये थी कि उनके पास इतने रुपए नहीं थे, इसलिए उन्होंने राज्य सड़क परिवहन निगम की नौकरी छोड़ दी और जीपीएफ के माध्यम से जो 70 हजार रुपए उन्हें मिले उससे ही उन्होंने यह मंदिर बनवाना शुरू कर दिया.

बरेला के ऊंचे पहाड़ पर बनाया गया मंदिर
यह मंदिर भी मैहर की तरह ही ऊंचे पहाड़ पर बनाया गया है और यहां भी दूर-दूर से मां शारदा के दर्शन करने भक्त आते हैं. नवरात्रि में माता का मंदिर और भी मन मोहक हो जाता है, जब चारों ओर प्रगति और उन्नति की हरी चादर माता के चरणों में फैल जाती है.

शहर से महज 17 किमी की दूरी पर स्थित है मंदिर
जबलपुर से महज 17 किमी दूर पहाड़ों पर स्थित माता शारदा के इस मंदिर का इतिहास बहुत पुराना तो नहीं है, लेकिन बताया जाता हैं कि मंदिर का निर्माण 15 जून 1975 को हुआ था.

मंदिर बनने के बाद कम होने लगे हादसे!
स्थानीय लोगों का कहना हैं कि जबलपुर से मंडला जाते समय रास्ते में गहरी घाटियां पड़ती हैं. आए दिन वाहन दुर्घटना होती थी, लेकिन अब माता की कृपा से यह दुर्घटनाएं कम होने लगी हैं. साथ ही कहा जाता है कि यहां से गुजरने वाले वाहन चालक थोड़ी देर के लिए जरूर रुकते हैं. माता के सामने माथा टेकते हैं, तभी आगे की यात्रा करना शुरू करते हैं.

बरेला शारदा मंदिर में नवरात्रि में लगता है भक्‍तों का तांता
मध्य प्रदेश में शारदा माता का एक मंदिर सतना जिले के मैहर में है. जबकि दूसरा जबलपुर के बरेला में, दोनों ही मंदिरों का बराबर महत्व है. यही वजह है कि नवरात्रि में माता के मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ लगी रहती है.

sharda Mata mandir

Tags: Jabalpur news, Navratri

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