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New Experiment : MP में गौ माता बन रही हैं सरोगेट मदर, जबलपुर में सरोगेसी से प्रैग्नेंट हुईं 15 गाय

सरोगेसी प्रोजेक्ट का मकसद किसानों और डेयरी संचालकों को अच्छी नस्ल की गाय देना है.

सरोगेसी प्रोजेक्ट का मकसद किसानों और डेयरी संचालकों को अच्छी नस्ल की गाय देना है.

Nanaji Deshmukh University of Veterinary Sciences, Jabalpur ने जिला प्रशासन की मदद से करीब 30 गाय ली थीं. उनमें सरोगेसी की गयी. सभी गायों की देखरेख वैज्ञानिक खुद कर रहे हैं और जो गाय गर्भवती हुई हैं उनके पोषण आहार का भी ध्यान रखा जा रहा है.

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जबलपुर. जबलपुर का नानाजी देशमुख पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय (Nanaji Deshmukh University of Veterinary Sciences, Jabalpur) कमाल के काम कर रहा है. अब उसने गायों के संरक्षण और संवर्धन के लिए एक गजब का तरीका खोज निकाला है. यहां के विशेषज्ञ डॉक्टरों ने गायों में सरोगेसी शुरू कर दी है. सड़क पर घूमने वाली आवारा गायों (COW) पर ये प्रयोग किया गया और वो गर्भवती हो गयीं. सरोगेसी (Surrogate mother) से ना केवल गायों का संरक्षण और संवर्धन होगा बल्कि नई और अच्छी नस्ल की गाय तैयार हो जाएंगी.

सड़कों पर घूमने वाली गाय और गौशालाओं में छोड़ी गई गाय भी अच्छी नस्ल के गाय या बछड़ों को जन्म दे सकती हैं. उम्मीद की ये किरण जबलपुर स्थित नानाजी देशमुख वेटनरी यूनिवर्सिटी दिखा रहा है. यहां के वैज्ञानिकों ने भ्रूण प्रत्यारोपण विधि से बेसहारा गायों को न केवल नया जीवनदान दिया है बल्कि इन गायों को सबसे अच्छी नस्ल की गाय को जन्म देने के लिए तैयार कर लिया है. विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने भ्रूण प्रत्यारोपण विधि के जरिए 15 गायों को गर्भवती किया है

. विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ एसपी तिवारी ने बताया कि जिस तरह इंसानों में सरोगेट मदर के जरिए संतान की प्राप्ति की जाती है. उसी तरह गायों में भी सेरोगेसी की जा सकती है.

कैसे होता है भ्रूण प्रत्यारोपण
भ्रूण प्रत्यारोपण विधि में बैल के अच्छे सीमन को वैज्ञानिक अच्छी नस्ल और ज्यादा दूध देने वाली गाय के अंदर डालते हैं. ऐसी गाय को डोनर कहा जाता है. जब गाय के अंदर भ्रूण परिपक्व हो जाता है तब सक्शन विधि के जरिए भ्रूण को गाय से निकाला जाता है और फिर सेरोगेट गाय में डाला जाता है.

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30 गाय पर प्रयोग, 15 प्रैगनेंट
विश्वविद्यालय ने जिला प्रशासन की मदद से करीब 30 गाय ली थीं. उनमें ये प्रयोग किया गया. सभी गायों की देखरेख वैज्ञानिक खुद कर रहे हैं और जो गाय गर्भवती हुई हैं उनके पोषण आहार का भी ध्यान रखा जा रहा है. प्रत्यारोपण विधि के जरिए विश्व विद्यालय की गौशाला में 15 गायों को गर्भवती किया जा चुका है. ये इसी महीने अक्टूबर के अंत तक अच्छी नस्ल के बछड़े या बछिया को जन्म देंगी. यह प्रयोग पूरी तरह सफल हुआ है.

गाय का भी भला
खास बात यह है कि बेहद कम लागत में विश्वविद्यालय ने इस प्रोजेक्ट को पूरा कर लिया है. विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ तिवारी ने बताया कि इस काम के लिए उन्होंने विश्वविद्यालय में ही लैब तैयार कर लिया है. प्रोजेक्ट का मकसद किसानों और डेयरी संचालकों को अच्छी नस्ल की गाय देना है. साथ ही उन गायों का संरक्षण करना है जिन्हें सड़कों या गौशालाओं के भरोसे छोड़ दिया जाता है. विश्वविद्यालय में इससे पहले हाल ही में कुत्ते के खून से आंख की झिल्ली बनायी गयी थी.

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