लाइव टीवी

कमलनाथ सरकार के गले की फांस बन सकती है धान खरीदी, ये हैं कारण

Prateek Mohan Awasthi | News18 Madhya Pradesh
Updated: December 4, 2019, 2:40 PM IST
कमलनाथ सरकार के गले की फांस बन सकती है धान खरीदी, ये हैं कारण
किसानों ने खरीदी केंद्रों के बाहर धान रखकर किया इंतज़ार

धान (Paddy) खरीदी इस बार सरकार के लिए आफत बन सकती है. पहले 25 नवम्बर और अब 2 दिसम्बर के बाद शुरू हुई धान खरीदी पटरी पर नहीं आ पाई है. किसान खरीदी केंद्रों के बाहर अपने धान की रखवाली करने लगे तो ओस ने उन्हें परेशान किया. कई जगहों पर सरकार ने केंद्र ही बदल दिए तो किसानों को इसका खामियाज़ा भी भुगतना पड़ रहा है. कुल मिलाकर अन्नदाता की नाराज़गी बढ़ती ही जा रही है.

  • Share this:
जबलपुर. मध्य प्रदेश में धान की खरीदी इस बार लगता है किसान के साथ-साथ सरकार (Kamalnath government) के लिए भी आफत बन सकती है. कर्ज के बोझ और केन्द्र से राशि न मिल पाने की दलीलों के बीच किसानों से धान की खरीदी इस साल शुरूआत से ही विवादों मे घिरी हुई है. पहले प्रदेश में धान खरीदी का काम 25 नवंबर से शुरू होना था लेकिन बाद में इसे बदलकर 2 दिसम्बर कर दिया गया. धान खरीदी केन्द्रों की जानकारी न मिल पाने और खरीदी की तारीख बढ़ने की सूचना न मिल पाने के कारण किसानों ने पिछले साल बने खरीदी केन्द्रों मे ही अपना सैकड़ों क्विंटल अनाज (Grains) रख दिया.

पहले तारीख बदली फिर ओस ने किया परेशान
फिर जब तारीख बदली तो करीब एक सप्ताह तक अपने अनाज की चौकीदारी भी की. इस दौरान आसमान से आफत के तौर पर गिर रही ओस ने भी अन्नदाता को जमकर परेशान किया, लेकिन अब जब खरीदी शुरू हुई तो खरीदी केन्द्रों को ही बदल दिया गया. की जगहों पर तो जहां किसानों ने अपना धान डम्प किया वहां से कई किलोमीटर दूर धान खरीदी केन्द्र बना दिए गए.

News - धान खरीदी को लेकर परेशान किसान सरकार की समस्याएं बढ़ा सकते हैं
इस साल शुरूआत से ही विवादों में रही है धान खरीदी


कई स्थानों पर नहीं खुले हैं धान खरीदी केन्द्र  
बात अकेले जबलपुर जिले की करें तो यहां 61 केन्द्रों में धान की खरीदी होनी है, जिसमे से अभी 17 केन्द्र ही शुरू हो पाए हैं. जिले के कलेक्टर का कहना है कि 61 में से 40 खरीदी केन्द्र वेयरहाउस के पास ही बनाए जाने का प्रस्ताव है, ताकि परिवहन के अपव्यय से बचा जा सके. वहीं किसानों द्वारा धान को अनाधिकृत केन्द्रों में रखे जाने पर कलेक्टर ने इसे किसानों की गलती बताया.

खरीदी केन्द्र बदलने से किसानों पर पड़ी दोहरी मार
Loading...

भले ही प्रशासनिक महकमा इस मामले में किसानों की गलती मान रहा हो लेकिन किसान और उनके नेता इस पर अपना अलग पक्ष रखते हैं. पहले तो खरीदी केन्द्र अब तक शुरू न होने और अंतिम समय में खरीदी के समय में बदलाव आने से किसानों को दोहरी मार झेलनी पड़ रही है. खुले आसमान में धान रखा होने से उनमें ओस से नमी भी आ गई है जबकि कुछ हिस्सा खराब भी हो गया है. ऐसे में किसान जाएं तो आखिर जाएं कहां. अब या तो किसान खुद के व्यय पर परिवहन पर खरीदी केन्द्रों पर अपना अनाज ले जाएं या फिर उसे वही सड़ने दें. कांग्रेस के ही पूर्व विधायक और किसान नेताओं ने इस सिलसिले में कलेक्टर से भी मुलाकात की है. निर्धारित समय के बाद भी धान की खरीदी पूर्ण रूप से शुरू न होना और खरीदी केन्द्रों का अब तक न खुलना कई सवाल खड़े करता है. बहरहाल देखना होगा कि कहीं धान सरकार के लिए गले की फांस न बन जाए.

ये भी पढ़ें -
मध्य प्रदेश के इस स्मार्ट शहर में गंदी नालियों से होकर घरों में जाता है पीने का पानी
इंदौर: डांस बार की सर्चिंग में पुलिस को मिले अहम सुराग, बढ़ सकती है आरोपी जीतू सोनी की मुश्किलें

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए जबलपुर से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: December 4, 2019, 2:37 PM IST
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...