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जबलपुर आर्मी बेस से जुड़े AK 47 तस्करी के तार! सेना के साथ IB-पुलिस करेगी जांच

जबलपुर आर्मी बेस से जुड़े AK 47 तस्करी के तार! सेना के साथ IB-पुलिस करेगी जांच

जबलपुर से जुड़े थे तस्करी के तार

जबलपुर से जुड़े थे तस्करी के तार

पुलिस का कहना है आर्मी बेस और फैक्ट्री के अधिकारी कर्मचारियों की मिलीभगत से तस्करी की जा रही थी. इसमें कुछ सिविल लोग भी शामिल थे. पुलिस की रडार पर अब वो सब हैं.

    एके 47 तस्करी केस की जांच अब जबलपुर पुलिस के साथ एटीएस, IB, और सेना भी करेगी. आईजी  इंटेलिजेंस मकरंद देउस्कर ने भोपाल में ये बात कही. इससे पहले जबलपुर पुलिस ने इस मामले में बड़ा ख़ुलासा किया था. तस्करी के तार जबलपुर के सुरक्षा संस्थान से जुड़े बताए जा रहे हैं. यहां से अब तक 100 से ज़्यादा AK 47 राइफल की तस्करी की जा चुकी है. तस्करी के इस रैकेट में सुरक्षा संस्थान के अफसर, कर्मचारियों के साथ सिविल अफसर भी अब पुलिस के रडार पर हैं. हो सकता है तस्करों का कनेक्शन नक्सलियों से भी हो.

    ए के 47 तस्करी केस में सेना के रिटायर्ड शस्त्रसाज पुरुषोत्तम लाल और उसकी पत्नी की गिरफ़्तारी के बाद अब एक के बाद एक ख़ुलासे हो रहे हैं. पुरुषोत्तम लाल को  मंगलवार को गिरफ़्तार किया था. उसके साथी सुरेश को भी पकड़ा जा चुका है. पुरुषोत्तम और सिविलीयन सुरेश ठाकुर से पूछताछ की जा रही है. ये लोग वर्कशॉप से कंडम AK-47 के पार्टस बदलकर सप्लाई करते थे. इसके एवज में पुरुषोत्तम को 5 लाख और सुरेश को 1 लाख रुपए मिलते थे. दोनों आरोपियों के पास से सात AK-47 के पार्टस भी मिले हैं.

    29 अगस्त को बिहार की मुंगेर पुलिस ने इस रैकेट का ख़ुलासा किया था. उसने इमरान नाम के आरोपी से तीन एके 47 राइफल और कुछ कल पुर्जे बरामद किए थे. इमरान ने पूछताछ में पुरुषोत्तम लाल का नाम लिया था. उसके बाद पुलिस उस तक पहुंची. आरोपी पुरुषोत्तम जबलपुर स्थित सुरक्षा संस्थान में काम करता था. जिन एके 47 हथियारों की तस्करी हो रही थी, दरअसल वो आर्मी के जवानों को सप्लाई करने के लिए थीं. लेकिन ये अवैध ढ़ंग से बिहार के मुंगेर भेजी जा रही थीं.

    आरोपी एक्स सर्विसमैन पुरुषोत्तम लाल तस्करी के सिलसिले में 29 बार मुंगेर जा चुका था. ऑनलाइन बुकिंग के टिकिट्स मिले हैं. वो 2008 में जबलपुर के सुरक्षा संस्थान से रिटायर हुआ था. रिटायरमेंट के चार साल बाद 2012 से वो हथियारों की तस्करी में लिप्त हो गया. बिहार के मुंगेर में ये हथियार सप्लाई किए जा रहे थे. जबलपुर आर्मी बेस से उसका लंबे समय से कनेक्शन था.

    जांच टीम का दावा है कि वो जल्द ही पूरे गिरोह का पर्दाफ़ाश कर देगी. पुलिस का कहना है आर्मी बेस और फैक्ट्री के अधिकारी कर्मचारियों की मिलीभगत से तस्करी की जा रही थी. इसमें कुछ सिविल लोग भी शामिल थे. पुलिस की रडार पर अब वो सब हैं.

    भारत के इतिहास में किसी भी सुरक्षा संस्थान से हथियारों की तस्करी और वो भी इतने बड़े पैमाने पर किए जाने का संभवत: ये पहला मामला है. पूरे मामले में अब इंटेलिजेंस और सुरक्षा जांच एजेंसियां सक्रिय हो गई हैं. (जबलपुर से प्रतीक मोहन अवस्थी की रिपोर्ट)

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    Tags: Police

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