Lockdown 2.0 में शुभ.. मंगल.. सावधान: मास्क पहनकर आए दूल्हा-दुल्हन, मंडप में रखा था सेनेटाइजर
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Lockdown 2.0 में शुभ.. मंगल.. सावधान: मास्क पहनकर आए दूल्हा-दुल्हन, मंडप में रखा था सेनेटाइजर
Lockdown के दौरान जबलपुर में हुई अनोखी शादी

दूल्हे अंशुल ने अपनी शादी के जरिए लोगों को ये भी संदेश दिया कि महामारी के इस दौर में शादी पर लोग अनावश्यक खर्च ना करें, बल्कि सादगी से जीवन के इस यादगार मौके को और खास बनाएं. उन्होंने सबसे लॉकडाउन की लक्ष्मण रेखा पार ना करने की भी अपील की

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जबलपुर. ऐसी शादी पहले कभी और कहीं नहीं हुई होगी. हालात भी कभी ऐसे नहीं रहे कि पूरा देश लॉक डाउन (Lock Down) हो और सब अपने-अपने घरों में कैद हों. ऊपर से जानलेवा महामारी (COVID-19) का खतरा अलग मंडरा रहा हो. मध्य प्रदेश के जबलपुर (Jabalpur) में कोरोना संक्रमण के बीच लॉक डाउन के दौरान ऐसी ही एक शादी हुई जिसमें सभी मास्क पहनकर शामिल हुए.

अब से पहले किसी ने ऐसी अनोखी शादी नहीं देखी होगी. न ही शादी की ऐसी रस्में देखी होंगी. मंडप में दूल्हा-दुल्हन मास्क पहने हों और हवन सामग्री के साथ सेनेटाइजर रखा हो. चाहें घराती हों या बाराती. सबके चेहरे पर मास्क लगा हो. इस शादी की खासियत ये रही कि शादी करवाने वाले पंडित जी भी मास्क पहनकर आए. शादी की रस्म शुरू होने से पहले सबने सेनेटाइजर से अपने हाथ साफ किए और फेरे पूरे होने के बाद इत्र के बजाए माहौल में सेनेटाइजर का स्प्रे किया गया.

लॉक डाउन पार्ट 2



बुधवार 15 अप्रैल से लॉक डाउन पार्ट 2 शुरू हो चुका है, इसमें ये अनोखी शादी हुई. लॉक डाउन 2.0 के पहले दिन जबलपुर के गढ़ा में रहने वाले अंशुल मिश्रा और आकांक्षा मिश्रा शादी के बंधन में बंध गए. दोनों की अगले महीने मई में शादी होनी तय थी. शादी के सारे इंतजाम भी कर लिए गए थे. लेकिन इस बीच लॉक डाउन की मियाद बढ़कर तीन मई हो गयी.


मां की तबियत नासाज

इसी बीच दूल्हे अंशुल की मां की तबियत खराब हो गई. दोनों के परिवारों को लगा कि अगर तीन मई के बाद भी लॉक डाउन खत्म नहीं हुआ तो फिर क्या होगा, इसलिए क्यों ना अभी ही शादी कर दी जाए. बस ये ख्याल आते ही प्रशासन को अंशुल और आकांक्षा के परिवारवालों ने अपनी समस्या बताई. प्रशासन ने सोच-विचार के बाद शादी के लिए मंजूरी दे दी. लेकिन इस सख्त हिदायत के साथ कि शादी में वर-वधु दोनों पक्ष के चुनिंदा लोगों को ही शामिल होने की इजाजत दी जाएगी. दूसरी हिदायत ये थी कि शादी में शामिल सभी घराती-बराती, दूल्हा-दुल्हन, पंडित जी मास्क लगाएं. सेनेटाइजर का इस्तेमाल करेंगे और सोशल डिस्टेंसिंग का भी ध्यान रखेंगे.



कोरोना से बचाव की रस्में
दोनों परिवारों ने इसकी रजामंदी दे दी. हिंदू रीति-रिवाज के साथ-साथ कोरोना से बचाव के नुस्खों के साथ शादी की रस्में पूरी हुईं. शादी में शरीक सभी लोगों ने मास्क पहना. हाथ साफ रखने के लिए सेनेटाइजर का इस्तेमाल किया और सोशल डिस्टेंसिंग बनाए रखा. गढ़ा के एक मंदिर में अंशुल और आकांक्षा की बड़ी सादगी से शादी हुई.

पंडितजी के लिए नया अनुभव

पंडित जी के लिए भी ये अब तक की सबसे अनोखी शादी थी. उन्होंने पहली बार ऐसी कोई शादी करवायी. दूल्हे अंशुल ने अपनी शादी के जरिए लोगों को ये भी संदेश दिया कि महामारी के इस दौर में शादी पर लोग अनावश्यक खर्च ना करें. बल्कि सादगी से जीवन के इस यादगार मौके को और भी खास बनाएं. साथ ही उन्होंने सबसे लॉकडाउन की लक्ष्मण रेखा पार ना करने की अपील की.

शादी के बाद समाज के प्रति फर्ज
अंशुल एक प्राइवेट अस्पताल में पैथोलॉजिस्ट हैं. उन्होंने अपनी मां की तबियत का ख्याल रखकर समय से पहले शादी कर आज्ञाकारी बेटा होने का फर्ज निभाया. फिर सरकार की हिदायत का पालन किया और अब शादी होते ही कोरोना वॉरियर के तौर पर संकट के इस काल में अपनी नौकरी पर वापस लौट रहे हैं.

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