आदिवासी परिवार ने नहीं दिया 'दावत' का न्‍यौता, गांव वालों ने सुना दिया ये फरमान

मामले ने जब तूल पकड़ा तो गांव वाले परिवार वालों को ही दोषी ठहराने लगे और समाज से बहिष्‍कार करने की बात को सिरे से खारिज करने लगे. हालांकि जबलपुर के सिंगोरी जमुनिया में सामने आई एक घटना ने आदर्श सामाजिक व्यवस्था को शर्मसार कर दिया है.

Pavan Patel | News18 Madhya Pradesh
Updated: August 30, 2019, 9:03 PM IST
आदिवासी परिवार ने नहीं दिया 'दावत' का न्‍यौता, गांव वालों ने सुना दिया ये फरमान
गांव वालों ने कर दिया हुक्‍का-पानी बंद. (सांकेतिक फोटो)
Pavan Patel | News18 Madhya Pradesh
Updated: August 30, 2019, 9:03 PM IST
आजादी के सात दशक बीत जाने के बाद भी आदिवासी समाज (Tribal Society) विकास की मुख्य धारा से नहीं जुड़ पा रहा है. जी हां, मध्‍य प्रदेश (Madhya Pradesh) के जबलपुर (Jabalpur) से करीब 55 किलोमीटर दूर चरगवां के एक गांव में सभ्य समाज और इंसानियत को शर्मसार कर देने वाला मामला सामने आया है.

दरअसल, गांव के एक आदिवासी परिवार का ग्रामीणों ने सिर्फ इसलिए सामाजिक बहिष्कार कर दिया, क्योंकि उस परिवार ने अपने छोटे बेटे की शादी में गांव के कुछ लोगों को न्यौता नहीं दिया. गांव के आदिवासी परिवार के इस कदम से नाराज होकर ग्रामीणों ने एकराय होकर उस परिवार का हुक्का पानी बंद करने का फरमान सुना दिया. अब परिवार को न तो लोग पीने का पानी भरने देते हैं और न ही दुकानदार उन्हें राशन देता है, जिसके बाद पीड़ित परिवार ने उच्च अधिकारियों से इसकी शिकायत कर दी.

अधिकारियों से शिकायत के बाद गांव वालों के बदले सुर
मामले ने जब तूल पकड़ा तो गांव वाले परिवार वालों को ही दोषी ठहराने लगे और समाज से बहिष्‍कार करने की बात को सिरे से खारिज करने लगे. हालांकि जबलपुर के सिंगोरी जमुनिया में सामने आई एक घटना ने आदर्श सामाजिक व्यवस्था को शर्मसार कर दिया है. जबलपुर से करीब 55 किलोमीटर दूर ग्राम पंचायत कटोरी के सिंगोरी जमुनिया में रहने वाला यह आदिवासी परिवार अपने ही समाज के जुल्मों सितम का शिकार है. गांव के युवक तुलाराम गौंड ने अपने छोटे भाई की शादी में समाज के कुछ दबंग बुजुर्गों को न्यौता क्या नहीं दिया कि पूरा का पूरा समाज ही इस परिवार के पीछे ही पड़ गया. जबकि ग्रामीणों ने एकराय होकर इस बेबस परिवार का सामाजिक बहिष्कार कर दिया और उसका हुक्का पानी बंद करने का फरमान जारी कर दिया. एक तो गरीबी की मार और अब ऊपर से समाज के बहिष्कार का कलंक लेकर यह परिवार इंसाफ की भीख मांग रहा है.

प्रशासन में मचा हड़कंप
शहर से 55 किलोमीटर दूर आदिवासी अंचल के एक गांव में सामने आई इस घटना ने प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मचा दिया है. पुलिस से लेकर प्रशासन के आला अधिकारियों ने सामाजिक बहिष्कार से जुड़े इस मामले की पड़ताल शुरू कर दी. बाकायदा पंचायत बैठाकर ग्रामीणों और पीड़ित परिवार के बीच सुलह कराने की कोशिशें की गई, लेकिन सामाजिक बहिष्कार से पीड़ित परिवार को राहत नसीब नहीं हो पा रही है. एक आदिवासी परिवार के साथ सामाजिक बहिष्कार की जानकारी जब फैलने लगी तो अब गांव वालों के भी सुर बदल गए हैं. ग्रामीण अब पीड़ित की शिकायत को ही गलत साबित करने में जुट गए हैं. गांव वालों से जब इस संबंध में पूछा गया तो उन्होंने ऐसे किसी भी बहिष्कार की घटना से इनकार कर दिया. सच कहा जाए तो हर कोई सामाजिक बहिष्कार के मामले के खुलासे के बाद आरोपों को झुठलाने में लगा है.

बहरहाल, पीड़ित परिवार के सदस्य इस बात को लेकर लगातार अधिकारियों से शिकायत कर रहे हैं कि उन्हें परेशान किया जा रहा है. यकीनन जबलपुर के जमुनिया गांव का यह मामला इस बात का सबूत है कि देश भले ही चांद का सफर तय कर ले, लेकिन हमारा समाज आज भी अज्ञानता और रूढ़िवाद से आजाद नहीं होना चाहता.
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First published: August 30, 2019, 8:52 PM IST
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