यहां अब असली को डराएगा नकली बाघ

मध्यप्रदेश के उमरिया में ग्रामीणों ने टाइगर की मूर्ति बनाकर बाघ की पहरेदारी का नुस्खा निकाला है.

मध्यप्रदेश के उमरिया में ग्रामीणों ने टाइगर की मूर्ति बनाकर बाघ की पहरेदारी का नुस्खा निकाला है.

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मध्यप्रदेश के उमरिया में ग्रामीणों ने टाइगर की मूर्ति बनाकर बाघ की पहरेदारी का नुस्खा निकाला है.

उमरिया जिले के टाइगर रिजर्व बांधवगढ से बाघ लगातार गांवों में आ रहे हैं जिससे ग्रमीणों में डर का माहौल है. इसी के मद्देनजर बाघों को गांव में घुसने से रोकने के लिए ये नुस्खा अपनाया है. गांव के बाहर बाघ की बनाई गई मूर्ति भले आदिवासी इलाकों के लिए आम बात हो और इसे बघेसुर देव के नाम से जाना जाता हो, लेकिन बांधवगढ टाइगर रिजर्व से लगे इलाकों में इसे बाघों की पहरेदारी में तैनात किया गया है.

इलाके में बाघों का मूवमेन्ट बढ़ा है और ग्रामीणों में दहशत के कारण आक्रोश भी पनप रहा है. लिहाजा, पार्क प्रबंधन ने इस प्राचीन नुस्खे के जरिए ग्रामीणों में पनप रहे आक्रोश को कम कर सामंजस्य बनाने की कोशिश शुरू की है.

बाघों के जानकारों की मानें तो क्षेत्र सीमा के वर्चस्व में भले बाघ-बाघ पर हमला बोल दे, लेकिन एक बाघ कभी दूसरे बाघ की सीमा में नहीं जाता है. इसी मान्यता को मानते हुए बाघ का प्रतिरुप तैयार कर ग्रामीणों के बघेसुर देव की प्राचीन मान्यता पर काम शुरू किया गया है. जिससे गांवों की ओर रुख करते ही बाघ को मूर्ति अपना प्रतिद्वंद्वी लगे और वह उसे असली बाघ समझ कर वापस चला जाए.

गौरतलब है कि बांधवगढ से लगे दर्जनों ऐसे गांव है जंहा बाघ हर साल तकरीबन हजारों की तादात में न सिर्फ मवेशियों का शिकार करते हैं, बल्कि लोगों पर भी हमले से नहीं चूकते. इस कारण ग्रमीणों में आक्रोश पनपता है और विवाद के हालात बनते हैं.

बहरहाल वन विभाग का बाघ के मूर्ति के जरिए पहरेदारी का यह नुस्खा कितना असरदार होगा यह कह पाना तो मुश्किल है, लेकिन इससे ग्रामीणों में पनप रहे आक्रोश में कमी जरुर दिखने लगी है.