कमलनाथ सरकार से नाराज़ जयस ने बुलाई आदिवासी पंचायत, किया ये बड़ा ऐलान

कांग्रेस (Congress) से नाराज़ जयस (jayas) ने झाबुआ उपचुनाव (Jhabua Byelection) लड़ने का फैसला किया है. जयस ने इसके लिए 8 सितंबर को झाबुआ में बड़ी आदिवासी पंचायत भी बुलाई है.

Sharad Shrivastava | News18 Madhya Pradesh
Updated: September 2, 2019, 5:13 PM IST
कमलनाथ सरकार से नाराज़ जयस ने बुलाई आदिवासी पंचायत, किया ये बड़ा ऐलान
उपचुनाव में झाबुआ से ताल ठोकेगा जयस
Sharad Shrivastava | News18 Madhya Pradesh
Updated: September 2, 2019, 5:13 PM IST
झाबुआ उपचुनाव (Jhabua By-election) से पहले कांग्रेस (Congress) को बड़ा झटका लगा है. जयस के राष्ट्रीय संरक्षक और कांग्रेस विधायक हीरालाल अलावा ने सरकार से नाराजगी के चलते उपचुनाव में अपना उम्मीदवार उतारने का ऐलान किया है. जयस अपनी दावेदारी मजबूत करने के लिए आने वाले 8 सितंबर को झाबुआ जिले में बड़ी आदिवासी पंचायत करने जा रहा है. जयस की नाराज़गी इन चुनावों में कांग्रेस को भारी पड़ सकती है. यदि जयस ने उम्मीदवार उतारा को कांग्रेस के लिए जीतना मुश्किल हो जाएगा.

आदिवासियों की अनदेखी का आरोप
जयस (जय आदिवासी युवा शक्ति संगठन) की मानें तो आदिवासियों को लेकर सरकार का रवैया उदासीन है और उनकी अनदेखी की जा रही है, लिहाजा मजबूरी में उसे अपना उम्मीदवार मैदान में उतारना पड़ेगा. हीरालाल अलावा ने सरकार से नाराज़गी जाहिर करते हुए आरोप लगाया कि प्रदेश में जयस समर्थित अधिकारियों के ट्रांसफर किए जा रहे हैं. जयस की मानें तो वो इस सिलसिले में जल्द ही सीएम कमलनाथ से मुलाकात कर अपनी नाराज़गी जाहिर करेगा. जयस इससे पहले अधिकारियों और मंत्रियों को लेकर भी अपनी नाराज़गी जता चुका है. जयस ने आरोप लगाया था कि अधिकारी और मंत्री उनकी सुनते नहीं.

News - जयस ने 8 सितंबर को झाबुआ में बुलाई आदिवासी पंचायत (फाइल फोटो)
जयस ने 8 सितंबर को झाबुआ में बुलाई बड़ी आदिवासी पंचायत (फाइल फोटो)


आदिवासी बहुल सीट है झाबुआ
झाबुआ मध्य प्रदेश की आदिवासी बहुल सीट है. 2018 में झाबुआ सीट से विधायक चुने गए बीजेपी के जीएस डामोर 2019 लोकसभा चुनाव में रतलाम-झाबुआ सीट से सांसद चुने गए हैं, इस वजह से झाबुआ सीट पर उपचुनाव कराया जाना है. कांग्रेस की ओर से पूर्व सांसद कांतिलाल भूरिया और पूर्व विधायक जेवियर मेड़ा दावेदारी कर रहे हैं. अगर जयस अपना उम्मीदवार मैदान में उतारता है तो कांग्रेस के लिए ये सीट जीतना मुश्किल हो सकता है.

उपचुनाव में भारी पड़ सकती है जयस की नाराज़गी
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जयस के राष्ट्रीय संरक्षक हीरालाल अलावा ने 2018 विधानसभा चुनाव में राजनीति में एंट्री करते हुए कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा था. हीरालाल अलावा इससे पहले कई बार जयस को सरकार में शामिल करने की मांग उठाते रहे हैं लेकिन सरकार के 9 महीने होने के बाद भी अब तक जयस को सरकार में कोई भागीदारी नहीं मिली है, इस वजह से भी जयस नाराज़ है. झाबुआ आदिवासी सीट है और जयस का आदिवासी इलाकों में अच्छा खासा दखल है. ऐसे में जयस की नाराजगी चुनाव के दौरान कांग्रेस पर भारी भी पड़ सकती है.

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First published: September 2, 2019, 5:02 PM IST
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