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झाबुआ उपचुनाव: BJP-कांग्रेस के दिग्गजों की धड़कनें तेज, जीत से बदलेगा सियासी माहौल

Anurag Shrivastav | News18 Madhya Pradesh
Updated: October 23, 2019, 5:30 PM IST
झाबुआ उपचुनाव: BJP-कांग्रेस के दिग्गजों की धड़कनें तेज, जीत से बदलेगा सियासी माहौल
किसके सिर बंधेगा जीत का सेहरा?

झाबुआ विधानसभा उपचुनाव (Jhabua Assembly By-Election) सत्‍तारूढ़ कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (Bharatiya Janata Party) के लिए साख की लड़ाई बन गया है. जबकि दोनों पार्टियां अपनी-अपनी जीत के दावे कर रही हैं. हालांकि कल यानी 24 अक्‍टूबर को ही पता चलेगा कि जनता किस पर मेहरबान हुई है. वैसे कांग्रेस को उम्‍मीद है कि मुख्‍यमंत्री कमलनाथ (Chief Minister Kamal Nath) की रणनीति उसे जीत दिलाएगी.

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झाबुआ. मध्‍य प्रदेश की झाबुआ विधानसभा (Jhabua Assembly) सीट पर 21 अक्‍टूबर को उपचुनाव (By-Election) हुआ था. इस सीट पर सत्‍तारूढ़ कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (Bharatiya Janata Party) अपनी-अपनी जीत के दावे कर रही हैं, लेकिन ये तो कल यानी 24 अक्‍टूबर को ही पता चलेगा कि जनता किस पर मेहरबान हुई है. हालांकि इस वक्‍त बीजेपी और कांग्रेस की नतीजे को लेकर धड़कनें तेज हैं, क्‍योंकि दोनों पार्टियों ने यहां अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी. झाबुआ में मुख्‍यमंत्री कमलनाथ (Chief Minister Kamal Nath) की रणनीति पर प्रचार करने वाली कांग्रेस को उम्मीद है कि सरकार के दस महीने में लिए गये फैसलों का असर चुनाव के नतीजों से सामने आएगा और कांग्रेस प्रत्याशी कांतिलाल भूरिया (Kantilal Bhuria) जीत हासिल करेंगे.

भाजपा और कांग्रेस ने किए दावे
झाबुआ के प्रभारी मंत्री सुरेंद्र सिंह बघेल ने दावा किया है कि कमलनाथ सरकार की आदिवासी योजनाएं पार्टी को जीत दिलाने का काम करेंगी. कांग्रेस के मुकाबले इस बार सबसे ज्यादा झाबुआ में जीत के लिए दम लगाने वाली बीजेपी का दावा है कि झाबुआ पर उसका कब्जा बरकरार रहेगा. हालांकि बीजेपी झाबुआ सीट को कांग्रेस का परंपरागत सीट मान रही है, लेकिन बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह ने कहा है कि झाबुआ में पार्टी प्रत्याशी भानू भूरिया को जीत मिलेगी.

2018 में भाजपा को मिली थी जीत

बहरहाल, 2018 में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के प्रत्याशी विक्रांत भूरिया को बीजेपी के उम्मीदवार जीएस डामोर ने दस हजार वोटों से शिकस्त दी थी. जबकि इसके बाद 2019 में लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के प्रत्याशी कांतिलाल भूरिया को झाबुआ रतलाम लोकसभा सीट पर 90 हजार वोटों से हार के बावजूद झाबुआ विधानसभा सीट पर 7 हजार 298 वोटों की बढ़त हासिल हुई थी. यही कारण है कि जीएस डामोर के सांसद बनने के बाद खाली हुई झाबुआ विधानसभा सीट पर कांग्रेस ने जीत के लिए पार्टी के सीनियर लीडर कांतिलाल भूरिया पर ही दांव खेला है. जबकि बीजेपी ने इस बारह युवा चेहरे भानू भूरिया को मैदान में उतारा है. हालांकि दोनों दलों की ओर से इस बार जितना दम झाबुआ में जीत के लिए लगाया है. उसके बाद ये सीट दोनों दल के लिए टफ हो गई है, लेकिन कल घोषित होने वाले नतीजों के बाद ये साफ हो जाएगी कि झाबुआ में किसका जलवा चला और किसकों जनता ने नकारा.

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First published: October 23, 2019, 5:27 PM IST
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