इस सीट पर वही सांसद बनता है, जो जीत चुका हो विधानसभा का चुनाव!
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इस सीट पर वही सांसद बनता है, जो जीत चुका हो विधानसभा का चुनाव!
इस सीट पर वही सांसद बनता है, जो जीत चुका हो विधानसभा का चुनाव!

झाबुआ-रतलाम सीट का एक मिथक यह भी है कि विधायक बनने के बाद लोकसभा का चुनाव लड़ने वाला उम्मीदवार सांसद जरूर बनता है.

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बीजेपी ने गुमान सिंह डामोर को 2019 की झाबुआ लोकसभा सीट से अपना उम्मीदवार बनाया है. गुमान सिंह मध्य प्रदेश के एकमात्र विधायक हैं, जिन्हें कांग्रेस या बीजेपी की ओर से टिकट मिला है. बता दें कि झाबुआ-रतलाम सीट का एक मिथक यह भी है कि विधायक बनने के बाद लोकसभा का चुनाव लड़ने वाला उम्मीदवार सांसद जरूर बनता है.

2019 की महाभारत में झाबुआ-रतलाम की सीट कांग्रेस और बीजेपी दोनों ही पार्टियों के लिए काफी अहमियत रखती है, लेकिन इस सीट को लेकर आंकड़े दिलचस्प कहानी बयां कर रही हैं. ये मिथक भी बना हुआ है. पहले और दूसरे आम चुनाव के बाद इस सीट पर वहीं सांसद बनता आ रहा है, जो विधायक का चुनाव जीत चुका हो. झाबुआ-रतलाम से 1 उपचुनाव मिलाकर सांसद के लिए 17 बार चुनाव हुए हैं. इसमें सबसे ज्यादा 6 बार दिलीप सिंह भूरिया सांसद रह चुके हैं. इसके बाद 5 बार इस सीट से कांतिलाल भूरिया सांसद रहे, 2 बार भागीरथ भंवर सांसद बने, 2 दफा अमर सिंह सांसद चुने गए, तो 1 बार जमुनादेवी और 1 बार सुरसिंह भूरिया सांसद का चुनाव जीत चुके हैं.

आपको बता दें कि 1952 के पहले आम चुनाव में अमर सिहं सांसद बने थे. इसलिए विधायक के चुनाव का सवाल ही नहीं था. 1957 में कांग्रेस ने दोबारा अमर सिंह को मौका दिया और वे दूसरी बार झाबुआ सीट से सांसद बने, लेकिन इसके बाद की कहानी ये है कि सांसद वो ही चुना गया जो पहले विधायक बनकर भोपाल पहुंचा. वहीं सन् 1962 के चुनाव में जमुना देवी झाबुआ से सांसद चुनी गईं. जमुना देवी इसके पहले 1952 में विधायक बनीं थीं.



वहीं सन् 1967 में सुरसिंह भूरिया झाबुआ के सांसद बने, सुरसिंह साल 1957 में विधायक का चुनाव जीते थे. 1971 में सोशलिस्ट पार्टी के भांगीरथ भंवर सांसद चुने गए, भंवर 1962 और 1967 में आलिराजपुर से विधायक रह चुके थे. साल 1980 में कांग्रेस के दिलीप सिंह भूरिया सांसद बने, दिलीप सिंह 1972 में पेटलावद से विधायक चुने गए थे. वहीं सन् 1980 से लेकर 1996 तक के लोकसभा चुनावों में कांग्रेस दिलीप सिंह भूरिया को मौका देती रही और वे हर चुनाव जीतते रहे.



सन् 1998 में कांग्रेस के कांतिलाल भूरिया झाबुआ सीट से सांसद बने, भूरिया 1980 से लेकर 1993 तक विधायक का चुनाव जीतते रहे. वहीं 1998 के बाद 1999, 2004 और 2009 का चुनाव भी कांतिलाल भूरिया ने जीता और सांसद बने. साल 2014 के लोकसभा चुनाव में झाबुआ-रतलाम सीट से मोदी लहर में दिलीप सिंह भूरिया चुनाव जीतकर सांसद बने.

राजनीतिक जानकार का कहना है कि संसदीय क्षेत्र काफी बड़ा है. 8 विधानसभा सीट इस क्षेत्र में आती है. इस लिहाज से पार्टियां चिर-परिचित और अनुभवी को मौका देती आई है.

अब 2019 के चुनाव में 7 वीं बार फिर कांतिलाल भूरिया मैदान में हैं, लेकिन दिलचस्प बात ये है कि उनका मुकाबला 5 महीने पहले विधायक बने गुमान सिंह डामोर से होने जा रहा है. बीजेपी ने रतलाम सीट से गुमान सिंह डामोर को अपना उम्मीदवार बनाया है. गुमान सिंह डामोर 5 महीने पहले ही विधायक बने हैं. बहरहाल, विधायक बनकर चुनाव लड़ने वाला उम्मीदवार सांसद बनेगा या फिर इस बार ये मिथक
टूटेगा. देखना दिलचस्प होगा कि इस बार इस सीट से आखिर सांसद कौन बनेगा.

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