इस शख्स की वजह से 79 लोगों की गई थी जान, खुद की मौत भी एक बड़ा रहस्य

मध्य प्रदेश के झाबुआ जिले केपेटलावद में हुए ब्लास्ट को दो साल पूरे हो गए. हादसे की दूसरी बरसी पर भी यहां के हालात ज्यादा नहीं बदले है.

News18Hindi
Updated: September 12, 2017, 12:55 PM IST
इस शख्स की वजह से 79 लोगों की गई थी जान, खुद की मौत भी एक बड़ा रहस्य
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Updated: September 12, 2017, 12:55 PM IST
मध्य प्रदेश के झाबुआ जिले के पेटलावद में हुए ब्लास्ट को दो साल पूरे हो गए. हादसे की दूसरी बरसी पर भी यहां के हालात ज्यादा नहीं बदले है. 79 लोगों की मौत का दर्द आज भी लोगों को डराता है. कई परिवारों की जिंदगी बर्बाद करने वाले इस हादसे का मंजर याद कर लोग आज भी सिहर जाते हैं.

पेटलावद ब्लास्ट की दूसरी बरसी पर न्यूज18 आपको उस शख्स के बारे में बता रहा है, जो पेटलावद का सबसे बड़ा गुनहगार है. 12 सितंबर 2015 को पेटलावद में हुए ब्लास्ट के लिए राजेंद्र कासवा को जिम्मेदार माना जाता है. इस हादसे में 79 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी थीं, जबकि 100 से ज्यादा लोग घायल हुए थे. दावा किया गया है कि इस ब्लास्ट में कासवा की भी मौत हो गई.

हादसे के 87वें दिन मृत घोषित हुआ कासवा
पेटलावद ब्लास्ट के 87 वें दिन यानि 7 दिसंबर को डीएनए रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने राजेंद्र कासवा की मौत की पुष्टि कर दी. हालांकि, पेटलावद के अधिकांश लोग इस बात को मानने के लिए राजी नहीं है कि इस हादसे में कासवा की भी मौत हो गई.

नार्को टेस्ट और डीएनए पर सवाल
पेटलावद के लोगों का तर्क हैं कि जिस पोटली में रखे शव के अवशेषों को कासवा का बताया गया, उसके सैंपल पहले टेस्ट के दौरान क्यों नहीं लिए गए. वहीं, कई लोगों का कहना है कि उन्होंने ब्लास्ट के बाद कासवा को जाते हुए देखा था.

वहीं, परिजनों के नार्को टेस्ट के लिए पहले पैसे नहीं होने और फिर पैसे मिलने पर टेस्ट के ठीक पहले डीएनए रिपोर्ट के सामने आने पर भी स्थानीय लोग सवाल उठाते है.
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हादसे के पहले कभी कोई कार्रवाई नहीं
स्थानीय लोगों के मुताबिक, राजेंद्र कासवा पिछले 10 साल से न्यू बस स्टैंड इलाके में यूरिया के गोदाम में अवैध रूप से विस्फोटक सामग्री रख रहा था. इस बारे में पुलिस और प्रशासन के अफसरों को कई बार शिकायत की गई. हादसे के पहले तक कासवा के खिलाफ कभी कोई कार्रवाई नहीं हुई.

पूरा परिवार ब्लास्टिंग से जुड़ा
राजेंद्र कासवा का पूरा परिवार ब्लास्टिंग का काम करता रहा है. हादसे के वक्त कारोबार की मुख्य जवाबदारी राजेंद्र के कंधों पर ही थी. बताया जाता है कि राजेंद्र के पिता शांतिलाल कासवा भी यही काम करते थे. उनके बाद राजेंद्र और दो भाइयों नरेंद्र और फूलचंद्र ने भी इसी काम को अपने हाथों में ले लिया. पिता शांतिलाल का पिछले साल ही निधन हुआ था.

10 साल पहले भाई की रहस्यमय मौत
राजेंद्र कासवा के एक अन्य भाई जमकलाल की 11 साल पहले मौत हुई थी. उस वक्त परिजनों ने गैस की टंकी में विस्फोट को जमकलाल की मौत की वजह बताया था. पूरे इलाके में माना जाता है कि हादसे जिलेटिन जैसी किसी विस्फोटक सामग्री की वजह से हुआ था. हालांकि, इस बारे में अधिकारियों ने कभी भी तह तक जाने की कोशिश नहीं की.
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