अफसरों की मनमानी स्‍टूडेंट्स पर पड़ रही है भारी, इस वजह से 54 लाख की बिल्डिंग से लगता है 'डर'

Virender Singh | News18 Madhya Pradesh
Updated: August 30, 2019, 7:13 PM IST
अफसरों की मनमानी स्‍टूडेंट्स पर पड़ रही है भारी, इस वजह से 54 लाख की बिल्डिंग से लगता है 'डर'
मुश्किल में है छात्रों की जान. (सांकेतिक फोटो)

झाबुआ के टांडी हाईस्कूल के बच्चों को अपनी पढ़ाई के लिए काफी मेहनत करनी पड़ती है. टांडी हाईस्कूल में जगह की कमी की वजह से 9वीं और 10वीं के छात्र-छात्राओं को चमना धामनी में बने स्कूल भवन में शिफ्ट किया गया, जो कि पुराने स्‍कूल से करीब 7 किलोमीटर दूर है.

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मध्‍य प्रदेश (Madhya Pradesh) के झाबुआ (Jhabua) में अफसरों की मनमानी के चलते टांडी हाईस्कूल (Tandi High School) के 143 बच्चों को दो तालाबों के बीच बनी पुलिया को पार करके उबड़-खाबड़ और सुनसान इलाके से स्कूल जाना पड़ता है. हैरानी की बात ये है कि 5 गांवों के बच्चे 7 किलोमीटर की ये दूरी पैदल तय करते हैं.

यकीनन झाबुआ के टांडी हाईस्कूल के बच्चों को अपनी पढ़ाई के लिए काफी मेहनत करनी पड़ती है. टांडी हाईस्कूल में जगह की कमी की वजह से 9वीं और 10वीं के छात्र-छात्राओं को चमना धामनी में बने स्कूल भवन में शिफ्ट किया गया, जो कि पुराने स्‍कूल से करीब 7 किलोमीटर दूर है. सुनसान और जंगल वाले इलाके में रास्ता उबड़-खाबड़ और कच्चा है. वहीं बारिश की वजह से बच्‍चों की दिक्कत और बढ़ जाती है. चमना धामनी में लगने वाले हाईस्कूल तक पहुंचने के लिए दो तालाबों के बीच जो पुलिया बनी है वो जर्जर है और पानी में डूब जाती है, लिहाजा जरा सी चूक से जान भी जा सकती है. फिर भी पढ़ाई के लिए बच्चे इस पुल को डरते-डरते पार करते हैं. हालांकि यहां कुछ गांव वाले पुलिया के किनारे पर खड़े रहकर बच्चों की मदद करते हैं ताकि कोई हादसा ना हो जाए. जबकि ज्यादा बारिश हो जाए तो बच्चों को अघोषित रूप से अवकाश मनाना पड़ता है, क्योंकि इसके सिवा कोई चारा भी नहीं होता.

बच्‍चों ने कही ये बात
बच्चे कहते हैं कि उन्हें किस जुर्म की सजा दी जा रही है. टांडी हाईस्कूल जहां वे पहले पढ़ते थे, वहां से उन्हें बेवजह चामनी धमना में सुनसान जंगल वाले इलाके में बने स्कूल भवन में शिफ्ट कर दिया गया. यहां साइकिल तो ठीक पैदल भी जाने में डर लगता है.

कक्षाएं रहती हैं खाली
चमना धामनी स्कूल में इन दिनों शिक्षक तो रोज पहुंच रहे हैं लेकिन कक्षाएं खाली पड़ी हुई हैं. जबकि बच्चे और उनके अभिभावक चाहते हैं कि कक्षाएं पहले से जारी टांडी हाईस्कूल में ही लगाई जाएं. वहीं लोगों को समझ में नहीं आ रहा है कि आखिर इतनी दूर सुनसान इलाके में इन बच्चों को क्यों शिफ्ट किया गया. छात्र-छात्राओं की परेशानी को देखते हुए लोग भी चाहते हैं कि कक्षाएं पुराने भवन में ही लगाई जाए. हालांकि गांव के सरपंच इस बाबत कलेक्टर और सांसद से गुहार लगा चुके हैं. आश्वासन मिला है, लेकिन निराकरण का इंतजार है.

मीडिया के दखल के बाद...
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उधर पूरे मामले में मीडिया के दखल के बाद आदिवासी विकास विभाग के सहायक आयुक्त प्रशांत आर्या ने भरोसा दिलाया है कि जल्द ही टांडी हाईस्कूल में कक्षाएं दो शिफ्ट में संचालित होगी. बच्चों को पुलिया के ऊपर से बहते पानी को पार करने की जरूरत नहीं है. आदिवासी विकास विभाग सहायक आयुक्त ने कहा कि ये बच्चे पढ़ना चाहते हैं लेकिन दुश्वारियां इनका रास्ता रोक रही हैं. अब हम इसका समाधान निकालने के करीब हैं और इसी वजह से कक्षाएं दो शिफ्ट में चलाई जाएंगी.

बहरहाल, आश्वासन की खिचड़ी कब पकती है, इसका इंतजार है. लेकिन इतनी दूर सुनसान इलाके में 54 लाख की इमारत को क्यों बनाई गई और यहां बच्चों को शिफ्ट क्‍यों किया गया. इसका जवाब देने कोई तैयार नहीं है.

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First published: August 30, 2019, 7:10 PM IST
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