उस सुबह हर तरफ था लाशों का ढेर, धूल-धुआं और चीख़-पुकार...

उस हादसे में आधिकारिक तौर पर 79 लोगों की मौत और 100 से ज़्यादा लोग घायल बताए गए. ब्लास्ट के आरोपी राजेन्द्र कासवा के ज़िंदा होने या मारे जाने को लेकर करीब 3 महीने तक सस्पेंस बना रहा.

Virendra Singh | News18 Madhya Pradesh
Updated: September 12, 2018, 11:15 AM IST
उस सुबह हर तरफ था लाशों का ढेर, धूल-धुआं और चीख़-पुकार...
पेटलावद ब्लास्ट
Virendra Singh | News18 Madhya Pradesh
Updated: September 12, 2018, 11:15 AM IST
पेटलावट ब्लास्ट की आज तीसरी बरसी है. 12 सितंबर 2015 को झाबुआ के पेटलावद में यह भयावह हादसा हुआ था. हादसे में 79 लोगों की मौत हो गई थी. उस हादसे के मंज़र को याद कर लोग आज भी सिहर उठते हैं.

इसी ब्लास्ट में पेटलावद ब्लास्ट के मुख्य आरोपी राजेन्द्र कासवां के मारे जाने की पुष्टि भी डीएनए रिपोर्ट से हो चुकी है. हालांकि उसकी मौत पर अब भी सवाल खड़े होते हैं.

हादसे वाले दिन पेटलावद के नया बस स्टैंड इलाके में रोज़ की तरह सुबह सवा आठ बजे तक यहां ज़िंदगी सामान्य गति से दौड़ रही थी. लेकिन इसी बीच यहां ज़ोरदार धमाका हुआ और पलक झपकते ही हर तरफ लाशों का ढेर और धूल का गुबार था. पेटलावद के उस इलाके में राजेन्द्र कासवां की खाद-बीज की दुकान थी. लेकिन उसने यहां अवैध रूप से जिलेटिन रॉड और ईडी का गोदाम बना रखा था.

सुबह करीब 8.30 बजे पहला धमाका हुआ. दुकान के भीतर से धुआं निकलने लगा. बस स्टैंड इलाका और पास में एक रेस्टोरेंट होने की वजह से उस वक्त काफी भीड़ थी. धमाका और धुआं देखकर लोग जिज्ञासा के कारण घटनास्थल के नज़दीक पहुंच गए. बस उसी दौरान दूसरा धमाका हुआ, जो पहले के मुकाबले कई गुना बड़ा था. इस धमाके ने लाशों का ढेर लगा दिया. हर तरफ थी केवल चीख़ और पुकार.

उस हादसे में आधिकारिक तौर पर 79 लोगों की मौत और 100 से ज़्यादा लोग घायल बताए गए थे. ब्लास्ट के आरोपी राजेन्द्र कासवा के ज़िंदा होने या मारे जाने को लेकर करीब 3 महीने तक सस्पेंस बना रहा. उसकी तलाश में जगह-जगह पोस्टर लगाए गए. लेकिन दिसंबर में तमाम अटकलों पर विराम लग गया, जब डीएनए रिपोर्ट में इसकी पुष्टि हुई कि राजेन्द्र कासवां भी इसी ब्लास्ट में मारा गया.

कांग्रेस सांसद कांतिलाल भूरिया लगातार इस पर सवाल खड़े करते रहे. भूरिया ने कुछ दिन पहले फिर दावा किया कि राजेन्द्र कासवां ज़िंदा है. सरकार ने लोगों के साथ छल किया है. भूरिया अब भी मामले की सीबीआई जांच की मांग कर रहे हैं. और भी कई लोगों को लगता है कि राजेन्द्र कासवां ज़िंदा है.

हर साल 12 सितंबर की तारीख़ आती है और दर्द की यादों के साथ गुज़र जाती है. उस हादसे की याद में नया बस स्टैंड का नाम ही श्रद्धाजंलि चौक कर दिया गया है. हादसे में मारे गए लोगों की तस्वीरें
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और नाम यहां लिख दिए गए हैं. मृतकों के परिवार, मित्र, रिश्तेदार और स्थानीय लोग अपनों को याद करते हुए यहां आते हैं और उन्‍‍‍‍हें श्रद्धाजंलि देते हैं.

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First published: September 12, 2018, 10:12 AM IST
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