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आखिर क्यों कड़कनाथ को लेकर झाबुआ से लेकर भोपाल तक है Alert, जानिए इसका राज

कड़कनाथ को लेकर प्रशासन की चिंता बढ़ गई है.
कड़कनाथ को लेकर प्रशासन की चिंता बढ़ गई है.

झाबुआ के रूंडीपाड़ा गांव के एक कड़कनाथ पोल्ट्री फॉर्म पर मुर्गें में NH5N1 वायरस की पुष्टि हुई. इसके बाद जिले के पशु चिकित्सा विभाग ने रूंडीपाड़ा गांव के 926 पक्षियों को डिस्पोज किया.

  • Last Updated: January 14, 2021, 9:41 PM IST
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झाबुआ. यहां के वर्ल्ड फैमस “कड़कनाथ” ने  सभी को चिंता में डाल दिया है. दरअसल झाबुआ के प्रसिद्ध कड़कनाथ प्रजाति के मुर्गे में बर्ड फ्लू  का वायरस पाए जाने के बाद झाबुआ से लेकर भोपाल तक प्रशासन अलर्ट पर है. इसके अलावा कड़कनाथ फार्म संचालक की चिंता ये है कि वे अब भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान महेन्द्र सिंह धोनी का ऑर्डर पूरा नहीं कर पाएंगे. प्रशासन को इसकी चिंता इसलिए भी है कि क्योंकि कड़कनाथ को बड़ी मुश्किल से बचाने की कोशिशें की जा रही हैं.
झाबुआ के रूंडीपाड़ा गांव के एक कड़कनाथ पोल्ट्री फॉर्म पर मुर्गें में NH5N1 वायरस की पुष्टि हुई. इसके बाद जिले के पशु चिकित्सा विभाग ने रूंडीपाड़ा गांव के 926 पक्षियों को डिस्पोज किया. इनमें से 902 पक्षी विनोद मेड़ा के पोल्ट्री फॉर्म के थे, बाकी 24 पक्षी आसपास के 8  घरों से निकाले गए. प्रशासन ने आदेश जारी कर दिए हैं कि पोल्ट्री फॉर्म और उसके आसपास के 1 किमी दायरे में अगले तीन महीने तक मुर्गीपालन और उसकी खरीदी बिक्री पर पाबंदी रहेगी.



10 सालों में दिलाई पहचान
दुलर्भ किस्म की प्रजाति के माने जाने वाले कड़कनाथ में बर्ड फ्लू पाए जाने के बाद भोपाल से भी टीम झाबुआ पहुंची और गांव का दौरा किया. बता दें सरकार और प्रशासन कड़कनाथ को लेकर इसलिए अलर्ट पर हैं, क्योंकि मुर्गे की यह प्रजाति विलुप्ति की कगार पर पहुंच गई थी. इस काले मुर्गे को पिछले 10 सालों में सरकार और प्रशासन ने भरसक कोशिक कर वैश्विक पहचान दिलाई है. सहकारी समितियों  और स्व सहायत समूहों के जरिये कड़कनाथ मुर्गी पालन को बढ़ावा दिया गया. ऐसे में जरा सी चूक सरकार की पिछले कई सालों की सारी मेहनत पर पानी फेर सकती है.



जानिये पालने वाले की कहानी

रूंडी पाड़ागांव के विनोद मेड़ा ऐसी ही एक सहकारी समिति से जुड़ कर कड़कनाथ मु्र्गी पालन करते थे. विनोद को पहचान तब मिली जब वे 2018 में मध्यप्रदेश सरकार के कड़कनाथएप से जुड़े और इसके बाद देश भर से उनके पास कड़कनाथ मुर्गों और चुजों के ऑर्डर आने लगे. पिछले साल नवंबर में भारतीय किक्रेट टीम के पूर्व कप्तान महेन्द्र सिंह धोनी ने विनोद मेड़ा को 2000 चुजों का ऑर्डर दिया था,....जिसकी डिलेवरी इसी महीने करनी थी. लेकिन, बर्ड फ्लू के कहर ने विनोद मेड़ा के सारे अरमानों पर पानी फेर दिया. विनोद मेड़ा के फार्म के सारे पक्षियों को नष्ट किया जा चुका है. अब उनकी चिंता है कि कैसे वे धोनी का ऑर्डर पूरा करेंगे. विनोद ने प्रशासन से मदद की गुहार लगाई है.

प्रशासन देगा मुआवजा

इधर, प्रशासन भी विनोद की तकलीफ को समझ रहा है. विनोद और उसके जैसे तमाम लोग कड़कनाथ मुर्गीपालन को लेकर हतोत्साहित ना हों इसके लिए जिला प्रशासन की ओर से मुआवजे की कार्रवाई की जा रही है. झाबुआ कलेक्टर रोहित सिंह ने ये भी कहा कि लोग भी सावधान रहें. प्रशासन पूरी तरह से इस बीमारी से निपटने के लिएमुस्तैद है.

लौ फेट और हाई प्रोटीन होता है कड़कनाथ में

कड़कनाथ में बर्ड फ्लू का संक्रमण कड़कनाथ मुर्गे के संरक्षण को लेकर अब तक की कोशिशों को जीरो कर सकता है. इसलिए झाबुआ प्रशासन की कोशिश है कि बर्ड फ्लू के संक्रमण को जिले में फैलेने से रोका जाए. इसके लिए जरूरी एहतियातन कदम उठाए जा रहे हैं. आपको बता दें कि झाबुआ कड़कनाथ मुर्गा अपने काले रंग और औषधीय गुणों के कारण पहचाना जाता है. इसके मीट में लो फैट और हाई प्रोटीन होता है. साथ ही, इसमें आयरन भी भरपूर होता है. 10 तरह की बीमारियों में इसका मीट फायदेमंद माना जाता है. साल दर साल इसकी डिमांड लगातार बढ़ती जा रही है. लेकिन, बर्ड फ्लू ने फिलहाल कड़कनाथ की डिमांड पर रोक लगा दी है.
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