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हरसूद की 15वीं बरसी पर विस्थापितों का छलका दर्द, कहा- देशहित में सबकुछ छोड़ा, सरकार ने दिया दगा

Harendra Nath Thakur | News18 Madhya Pradesh
Updated: June 30, 2019, 1:12 PM IST

देश के सबसे बड़े बांध ‘इंदिरा सागर बांध’ के निर्माण के लिए खंडवा जिले की एक तहसील हरसूद के करीब 245 गांव के ढाई लाख लोगों को विस्थापिथ कर दिया गया था.

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मध्य प्रदेश के खंडवा जिले के ‘इंदिरा सागर बांध’ में हरसूद शहर को जलमग्न हुए आज 15 साल हो गए. राजा हर्षवर्धन की नगरी रही हरसूद शहर को सरकार ने 30 जून के बाद शासन के रिकॉर्ड से मिटा दिया था. इसके बाद यह शहर हमेशा के लिए इंदिरा सागर के पानी में डूब गया. मई 2004 के अंतिम सप्ताह तक शहर के निवासी अपने पूर्वजों की सारी यादों को छोड़ नए शहर की ओर बढ़ चले थे. 15 साल पहले जो शहर आबाद हुआ करता था, वह आज खंडहर में बदल गया है.

देश के सबसे बड़े बांधों में से एक ‘इंदिरा सागर बांध’ के निर्माण के लिए खंडवा जिले की एक तहसील हरसूद के करीब 245 गांव के ढाई लाख लोगों को विस्थापिथ कर दिया गया था. एक हजार मेगावाट बिजली बनाने के प्लांट के लिए लोगों ने छाती पर पत्थर रख अपने ही घरों को तोड़ दिया. प्रदेश वासियों के लिए अपना सबकुछ छोड़ विस्थान करने वाले लोग आज भी सरकार के हाथों खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं.

चंडीगढ़ की तर्ज पर नया शहर विकसित करने का आश्वासन-

विस्थापन के वक्त लोगों को चंडीगढ़ की तर्ज पर ‘नया हरसूद’ निर्मित करने का आश्वासन दिया गया था. लेकिन न शहर चंडीगढ़ जैसा बन पाया और न ही लोगों को वो सुविधाएं मिल पाई. कई परिवार ऐसे भी हैं जो खंडवा में रोजगार नहीं मिलने के कारण बाहर जाकर इधर-उधर बस गए.

आज भी याद ताजा करने के लिए आते हैं लोग-

जब गर्मियों के दिनों में बांध के बैकवाटर का पानी उतरता है, तो दूर-दूर जा बसे लोग अपने उजड़े हुए कस्बे से मिलने चले आते हैं. हर साल 30 जून को इसके उजाड़े जाने की बरसी पर सैकड़ों लोग इकट्ठा होते हैं और अपनी इमारतों, अपने मकान की खंडहरों में अपने यादों को टटोलते हैं. जबलपुर से आई सलोनी विस्थापन के वक्त 30 जून 2004 को मात्र सात साल की थी.  लेकिन अब यही सलोनी अपने पति को साथ लेकर अपने उस आशियाने पर आई थी जहां उसका बचपन बीता था.

मुख्यमंत्री कमलनाथ ने जगाई उम्मीद-
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हरसूद कस्बे के लोगों की आंखों में अब भी अपने पुराने शहर की तस्वीरें और मन में यादों का एक विशाल बवंडर समाहित है. उनके साथ जिंदगी का सबसे बड़ा छलावा हुआ है. नए शहर की अव्यवस्थाएं देखकर लोगों की पीड़ा और बढ़ जाती है. हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव के समय मुख्यमंत्री कमलनाथ ने हरसूद को गोद लेने की घोषणा की थी. जिसके बाद लोगों में हरसूद को लेकर एक नई उम्मीद जगी है.

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First published: June 30, 2019, 1:08 PM IST
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