डेम के एक दर्जन गेट्स में दरार, चार साल से अधूरा है मरम्मत का काम
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डेम के एक दर्जन गेट्स में दरार, चार साल से अधूरा है मरम्मत का काम
इंदिरा सागर बांध

मध्यप्रदेश के खंडवा जिले में बने देश के सबसे बड़े बांध इंदिरा सागर में बरसात के मौसम में कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है. बांध के गेट्स की बकेट में आई दरारों को भरने का काम इस वर्ष भी पूरा नही हो पाया है.

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मध्यप्रदेश के खंडवा जिले में बने देश के सबसे बड़े बांध इंदिरा सागर में बरसात के मौसम में कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है. बांध के गेट्स की बकेट में आई दरारों को भरने का काम इस वर्ष भी पूरा नही हो पाया है. बारशि का मौसम करीब होने के चलते बांध में कभी भी हादसा होने का अंदेशा है. बता दें कि बकेट्स में आई दरारें भरने का काम पिछले चार साल से चल रहा है. इससे अब नर्मदा हाइड्रो इलेक्ट्रिक डेवलपमेंट कर्पोरेशन एनएचडीसी और निर्माण एजेंसी सवालों के घेरे में है.

जानकारी के अनुसार इंदिरा सागर बांध के 20 गेट्स में से करीब एक दर्जन गेट्स के बकेट में चार साल पहले दरारें आ गई थीं. इन दरारों को भरने का काम इस वर्ष भी बरसात से पहले पूरा नही हो पाया है. इन गेटों से गिरने वाले पानी का प्रेशर इतना अधिक होता है कि पिछले कई सालों से इन गेट्स के बकेट में दरार और गड्ढे हो गए हैं. बकेट का निर्माण 1998 में नर्मदा घाटी​ विकास प्राधिकरण एनवीडीए ने कराया था. बांध सूत्रों के अनुसार निर्माण के समय बकेट की क्षमता 70 हजार क्यूसेक पानी सहन करने की थी. पिछले कुछ वर्षों में इन 20 गेटों से मात्र 30 हजार क्यूसेक पानी ही डिस्चार्ज किया गया. इसके बावजूद बकेट का ध्वस्त होना सवाल खड़े कर रहा है.

एनएचडीसी द्वारा बकेट के मरम्मत कार्य की जिम्मेदारी एसईडब्ल्यू कंपनी को सौंपी गई थी. लेकिन पिछले काम अब तक पूरा नही हो पाया है. कुछ दिनों बाद बारिश शुरू हो जाएगी, जिससे बकेट मरम्मत कार्य फिर अधर में लटक जाएगा. अगर बांध के बकेट को जल्द दुरुस्त नही किया गया तो कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है.
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