ये हैं खंडवा के मुसद्दी लाल, 12 साल से इंसाफ के लिए अधिकारियों के काट रहे हैं चक्‍कर!
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ये हैं खंडवा के मुसद्दी लाल, 12 साल से इंसाफ के लिए अधिकारियों के काट रहे हैं चक्‍कर!
बांध के पानी के रिसाव से किसान है परेशान.

अपनी समस्याओं से परेशान मुसद्दी लाल (Mussaddi Lal) को ऑफिस-ऑफिस (Office-office) के चक्कर काटते हुए छोटे पर्दे पर जरूर देखा होगा. लेकिन रियल लाइफ में खंडवा (Khandwa) के ओंकारेश्वर के किसान मौजीलाल (Moujilal) भी कुछ ऐसी ही परेशानी से जूझ रहे हैं. हैरानी की बात है कि उन्‍हें 12 साल से न्‍याय नहीं मिला है.

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खंडवा. अपनी समस्याओं से परेशान मुसद्दी लाल (Mussaddi Lal) को ऑफिस-ऑफिस (Office-office) के चक्कर काटते हुए छोटे पर्दे पर जरूर देखा होगा. लेकिन हम आपको आज मिलवाते हैं खंडवा के एक मुसद्दी लाल से जो पिछले 12 वर्षों से न्याय के लिए ऑफिस-ऑफिस चक्कर लगा रहे हैं. हैरानी की बात ये है कि अब तक उन्‍हें इंसाफ नहीं मिल पाया है. ये मामला खंडवा (Khandwa) के ओंकारेश्वर के किसान मौजीलाल (Moujilal) से जुड़ा हुआ है. यह किसान इंदिरा सागर बांध (Indira Sagar Dam) की वजह से बर्बाद हो गया है.

इंदिरा सागर बांध की वजह से हुए बर्बाद
ये तकदीर भी न जाने कब और किसे क्या-क्या रंग दिखाती है. रंक को राजा तो राजा को रंक बनाती है. ऐसा ही एक मामला खंडवा के ओंकारेश्वर के किसान मौजीलाल (Moujilal) से जुड़ा हुआ है. इंदिरा सागर बांध बनने से पहले तक वह एक सम्पन्न किसान हुआ करते थे, लेकिन बांध का रिसाव उनके खेत में इस कदर हो रहा है कि आज जमीन होने के बावजूद वह अपनी गीली खेत में कुछ भी उपजाने में नाकाम हो गए हैं. सरकार और प्रशासन से कई बार मिन्नतें की, ऑफिसों के चक्कर लगाए, लेकिन 12 वर्षों में भी उनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ, लिहाजा अब 14 नवम्बर तक प्रशासन को अल्टीमेटम दिया है. अगर मौजीलाल की मांग पूरी नहीं हुई तो वह अपनी जान दे देगा.

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किसान की धमकी के बाद जिला प्रशासन ने अब कार्रवाई तेज कर दी है.

किसान की धमकी के बाद...


इधर किसान की धमकी के बाद जिला प्रशासन ने अब कार्रवाई तेज कर दी है. खंडवा कलेक्टर तन्वी सुन्द्रियाल ने कहा कि पानी की वजह से भले ही वह खेती नहीं कर पा रहा है, लेकिन उसके खेत में अगर मछली पालन की व्यवस्था की जाए तो उसे इसका लाभ मिल सकता है.

बहरहाल, 12 साल से मौजीलाल जिस तरह से इंसाफ के लिए चक्कर काट रहा है वह वाकई लोकतंत्र के मुंह पर तमाचा है. अब देखना यह है कि कलेक्टर के इस प्रयास से आखिर उसे इंसाफ कब तक मिलेगा.

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