मध्य प्रदेश में जापानी तकनीक से ऐसे बचाएगें पर्यावरण

आज पुरा विश्व ग्लोबल वार्मिंग से परेशान है. जंगल लगातार सिकुरते जा रहे हैं. पर्यावरण को हो रहे नुकसान की भरपाई के लिए खंडवा में वन विभाग ने जापानी तकनीक (सीड बॉल) का सहारा लिया है.

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आज पुरा विश्व ग्लोबल वार्मिंग से परेशान है. जंगल लगातार सिकुड़ते जा रहे हैं. पर्यावरण को हो रहे नुकसान की भरपाई के लिए खंडवा में वन विभाग ने अनोखा तरीका अपनाया. वन विभाग  पार्यावरण संरक्षित के लिए जापानी तकनीक सीड बॉल का सहारा ले रहा है. सीड बॉल तकनीक से पार्यावरण संरक्षित होगा तो होगा ही साथ ही हमारी वन सम्पदा भी समृद्ध होगी. सामान्य तौर पर सीड बॉल देखने में आपको मिट्टी का गोले जैसी लगेगी लेकिन इसकी मिट्टी कुछ खास  होती है. सीड बॉल को मिट्टी में कम्पोस्ट का मिश्रण मिलाकर बनाया जाता है. सीड बॉल के अंदर नीम, बरगद, करंज, सलाई के बीज डालकर तैयार किया जाता है. फिर इस बॉल को बरसात के सीजन में किसी भी निर्जन, पहाड़ी इलाके, खाई में फेंक देते हैं. जहां बारिश का पानी लगते ही इस मिट्टी के बॉल के अंदर रखा बीज अंकुरित होकर पौधा बन जाता है.

पर्यावरण बचाने की अनोखी मुहिम, Unique campaign to save the environment
खंडवा वन विभाग के सहयोग से महिलाए सीड बॉल तैयार करते हुए


क्यों खास है सीड बॉल तकनीक



एक तरफ जहां पौधा रोपण मेहगी प्रक्रिया है वहीं सीड बॉल तकनीक पौधा रोपण की तुलना में काफी सस्ती पड़ती है. पौधा रोपण की तुलना में इसका ट्रांसपोटेशन भी आसान और सस्ता है. पौधा रोपण करने के लिए आपको अलग से टाइम और संसाधन की जरूरत होती है, लेकिन सीड बॉल को आसानी से अपने साथ रखा जा सकता है और इसे किसी भी निर्जन, पहाड़ी इलाके, खाई में फेंका जा सकता है. फेके हुए सीड बॉल में बारिश का पानी लगते ही इस मिट्टी के बॉल के अंदर रखा बीज अंकुरित होकर पौधा बन जाता है. जब तक बारिश नही होती तब तक सीड बॉल को सुरक्षा देने की भी जरूरत नहीं क्यों कि बीज सीड बॉल के अंदर सुरक्षित रहते हैं और बारिश का पानी लगने के बाद ही इस मिट्टी के बॉल के अंदर बीज से अंकुरण फूटता है.
पर्यावरण बचाने की अनोखी मुहिम, Unique campaign to save the environment
वितरण के लिए तैयार सीड बॉल, पौधा रोपण की तुलना में इसका ट्रांसपोटेशन आसान और सस्ता है.


 

बहुत तेजी से बड़ रही है सीड बॉल की मांग

जिले में इस सीड बॉल की मांग बहुत तेजी से बड़ रही है. सैकड़ों लोग सीड बॉल की मदद से हरिलायी बढ़ाने में योगदान दे रहे हैं. साथ ही इस तकनीक की भी सराहना कर रहे हैं. सीड बॉल की ये तकनीक यदि कारगर सिद्ध होता है तो इससे आने वाली पीढ़ियों के लिए ये वरदान सिद्ध हो सकती है.
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