जूता-चप्पल स्टैंड पर लगा दी शिक्षकों की ड्यूटी, विरोध होने पर कलेक्टर ने बदला आदेश

विश्व विख्यात ज्योतिर्लिंग ओंकारेश्वर मंदिर के बाहर जूते-चप्पल स्टैंड पर सरकारी शिक्षकों की ड्यूटी लगाए जाने के मामले ने तूल पकड़ लिया है. इस संबंध में जिला कलेक्टर ने आनन-फानन में सफाई दी है.
विश्व विख्यात ज्योतिर्लिंग ओंकारेश्वर मंदिर के बाहर जूते-चप्पल स्टैंड पर सरकारी शिक्षकों की ड्यूटी लगाए जाने के मामले ने तूल पकड़ लिया है. इस संबंध में जिला कलेक्टर ने आनन-फानन में सफाई दी है.

विश्व विख्यात ज्योतिर्लिंग ओंकारेश्वर मंदिर के बाहर जूते-चप्पल स्टैंड पर सरकारी शिक्षकों की ड्यूटी लगाए जाने के मामले ने तूल पकड़ लिया है. इस संबंध में जिला कलेक्टर ने आनन-फानन में सफाई दी है.

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मध्यप्रदेश के खंडवा जिले स्थित विश्व विख्यात ज्योतिर्लिंग ओंकारेश्वर मंदिर के बाहर जूते-चप्पल स्टैंड पर सरकारी शिक्षकों की ड्यूटी लगाए जाने के मामले ने तूल पकड़ लिया है. इस संबंध में जिला कलेक्टर ने आनन-फानन में सफाई दी है.

कलेक्टर डॉ. महेश अग्रवाल ने कहा है कि सिंहस्थ में सभी सरकारी कर्मचारियों की ड्यूटी लगाए जाने के दौरान कुछ शिक्षकों ने सेवा देने की लिखित में मांग की थी. जिसके हिसाब से शिक्षकों की ड्यूटी मंदिर गर्भ गृह के पास, बस स्टैंड, जूता-चप्पल स्टैंड और विभिन्न घाटों पर लगाई गई थी. लेकिन शिक्षक संघ ने जब आपत्ति दर्ज कराई तो उनकी ड्यूटी चप्पल स्टैंड से हटा दी गई.

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कलेक्टर डॉ. महेश अग्रवाल ने अपनी सफाई में कहा है कि चप्पल-जूते की निगरानी के लिए ठेकेदार के 100 से ज्यादा कर्मचारी ड्यटी कर रहे हैं. वहां से शिक्षकों की तैनाती हटा दी गई है.
दरअसल, उज्जैन सिंहस्थ में आने वाले श्रद्धालुगण ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन करने भी आ रहे हैं. इसके मद्देनजर सरकारी कर्मचरियों की ड्यूटी अलग-अलग स्थानों पर लगाई गई है.

शिक्षकों के मुताबिक, श्रृद्धालुओं की सेवा करना हर कोई पुण्य का काम मानता है; परंतु कलेक्टर ने बाध्य करते हुए शिक्षकों को आदेश दिए हैं कि अगले 22 दिनों तक ओंकारेश्वर में जूता-चप्पल स्टैंड संभालना होगा और आदेश का पालन न करने पर सस्पेंड कर दिया जाएगा.
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