लोहार की बेटी Inspirational की स्टोरी, गरीबी और अभावों को मात देकर 12वीं में किया टॉप
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लोहार की बेटी Inspirational की स्टोरी, गरीबी और अभावों को मात देकर 12वीं में किया टॉप
समरीन बताती है कि उसकी सफलता में उसके वालिद का बहुत योगदान है. घर से स्कूल दूर होने के बावजूद अपनी बेटी को रोज स्कूल छोड़ना और स्कूल से लाना उनकी दिनचर्या थी.

समरीन बताती है कि उसकी सफलता में उसके वालिद का बहुत योगदान है. घर से स्कूल दूर होने के बावजूद अपनी बेटी को रोज स्कूल छोड़ना और स्कूल से लाना उनकी दिनचर्या थी.

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माध्यमिक शिक्षा मंडल ने दसवीं और बारहवीं के परीक्षा परिणाम की घोषणा कर दी. इस बार बारहवीं में टॉप टेन में स्थान बनाने वाली खंडवा की बेटी समरीन ने गरीबी और मुफलिसी के बावजूद सफलता का परचम लहराया है.

खंडवा की यह बेटी समरीन एक मिसाल है जो गरीबी और मुफलिसी से तंग आकर विपरीत हालत के आगे घुटने टेक देते हैं. समरीन का पूरा बचपन ही गुरबत में गुजरा समरीन के पिता हुसैन खंडवा में लोहारी का काम करते हैं. तपती भट्ठी में लोहे से औजार बनाकर अपने परिवार का पेट भरने वाले पिता ने गरीबी के आगे घुटने नहीं टेके.

परिवार में तीन बेटी होने के बावजूद तीनों को उच्च तालीम दे रहे हैं. समरीन बताती है कि उसकी सफलता में उसके वालिद का बहुत योगदान है. घर से स्कूल दूर होने के बावजूद अपनी बेटी को रोज स्कूल छोड़ना और स्कूल से लाना उनकी दिनचर्या थी.



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समरीन की बड़ी बहन आफरीन भी वर्ष 2015 में दसवीं में प्रदेश की टॉपर रही है. लिहाजा समरीन को पढ़ाई में उसने भी खूब मार्गदर्शन किया.

समरीन के घर में आज भी टीवी नहीं है, लेकिन समरीन की सफलता के किस्से सुनकर मीडिया और टीवी वालों का घर पर जमावड़ा लग चूका है. समरीन इस समाज में शिक्षित होकर एक शिक्षक बनने का सपना संजोए हुए है. ताकि भविष्य में अपने साथ-साथ कइयों को अच्छी तालीम दे सके.
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