BIRTHDAY'S SPECIAL: किशोर दा को ताउम्र याद रही खंडवा की दूध-जलेबी का स्वाद

बॉलीवुड के पार्श्व गायक और कलाकार किशोर कुमार की आज जयंती है. मुंबई की चकाचौंध से दूर किशोर दा की आत्मा खंडवा में ही बसा करती थी.

Harendra Nath Thakur | News18 Madhya Pradesh
Updated: August 4, 2019, 7:09 AM IST
BIRTHDAY'S SPECIAL: किशोर दा को ताउम्र याद रही खंडवा की दूध-जलेबी का स्वाद
मुंबई की चकाचौंध से दूर किशोर दा की आत्मा खंडवा में बसती थी
Harendra Nath Thakur
Harendra Nath Thakur | News18 Madhya Pradesh
Updated: August 4, 2019, 7:09 AM IST
बॉलीवुड के पार्श्व गायक, अभिनेता, निर्देशक आभाष कुमार गांगुली उर्फ किशोर कुमार की आज 90वीं जयंती है. हजारों किशोर प्रेमी आज अपने आराध्य किशोर कुमार को याद करने के लिए उनके गृह नगरी खंडवा पहुंचते हैं. मुंबई की चकाचौंध से दूर किशोर दा की आत्मा खंडवा में ही बसा करती थी. लिहाजा अपने आखिरी दिनों में वो खंडवा में ही बसने का मन बना चुके थे. किशोर कुमार अपने उन पुराने दिनों को जीना चाहते थे, जो उन्होंने अपने दोस्तों के साथ खंडवा में जिया था. लेकिन उनका वो सपना पूरा नहीं हो सका. आज उनके मकान के बंटवारे को लेकर भाइयों के बीच मतभेद से देशभर के किशोर कुमार के प्रेमियों में इसे लेकर निराशा है. ऐसे में लोग किशोर कुमार के घर को अब संग्रहालय बनाने की मांग करने लगे हैं.

आभाष ने अपना नाम बदलकर किशोर कुमार रख लिया

किशोर कुमार ने कोरस गायक के रूप में अपने फिल्म कैरियर की शुरुआत की.


किशोर कुमार, बॉलीवुड का वो नायाब हीरा थे, जिन्होंने खंडवा में जन्म लेकर न सिर्फ खंडवा का नाम रोशन किया बल्कि देश-विदेशों तक अपनी छवि के साथ खंडवा को एक अलग पहचान दिलाई. 4 अगस्त 1929 को मध्य प्रदेश के छोटे से शहर खंडवा जिले में एक बंगाली परिवार में एक लड़के का जन्म हुआ, जिसका नाम आभाष रखा गया. चार भाई बहनों में आभाष गांगुली सबसे छोटे थे. खंडवा में बचपन बीतने के बाद कॉलेज की पढ़ाई पूरी कर आभाष अपने बड़े भाई अशोक कुमार के पास मुंबई चले गए. 40 के दशक में अशोक कुमार बॉलीवुड में पूरी तरह स्थापित हो चुके थे. यहां आभाष ने अपना नाम बदलकर किशोर कुमार रख लिया और कोरस गायक के रूप में अपने फिल्म कैरियर की शुरुआत की.

फिर किशोर कुमार ने पीछे नहीं देखा

किशोर कुमार ने अपनी एक्टिंग का लोहा भी मनवाया.


1948 में खेमचन्द्र प्रकाश के संगीत निर्देशन में फिल्म जिद्दी के लिए उन्होंने पहली बार देवानंद के लिए गाना गाया. गीत के बोल थे "मरने की दुआएं क्यूं मांगू, जीने की तमन्ना कौन करे". उसके बाद किशोर कुमार ने फिर कभी पलटकर पीछे नहीं देखा. राजेश खन्ना, देवआनंद, अमिताभ बच्चन जैसे कलाकारों के लिए किशोर कुमार ने न सिर्फ अपनी आवाज दी बल्कि अपनी एक्टिंग का लोहा भी मनवाया.
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खंडवा के प्रति उनका प्रेम देखते बनता था

किशोर कुमार ने भले ही आसमान जितनी शोहरत हासिल कर ली, लेकिन खंडवा के प्रति उनका प्रेम देखते बनता था. बचपन में लालाजी की दुकान की खाई दूध-जलेबी का जिक्र भी उन्होंने ताउम्र किया. देश या विदेश के किसी कोने में भी स्टेज प्रोगाम देने जाते तो वो वहां अपने को किशोर कुमार खंडवा वाला कहना नहीं भूलते थे. लोगों ने उन्हें सनकी कहा, मनमौजी कहा. लेकिन वो दिल से वाकई किशोर थे.

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First published: August 4, 2019, 7:07 AM IST
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