Teacher's Day : टीचर खुद नहीं आतीं स्‍कूल, पढ़ाने के लिए दिहाड़ी पर रख ली महिला
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Teacher's Day : टीचर खुद नहीं आतीं स्‍कूल, पढ़ाने के लिए दिहाड़ी पर रख ली महिला
गांव मेहलू का प्रायमरी स्‍कूल.

खंडवा जिला मुख्यालय से 90 किमी दूर इस स्कूल में करीब 67 बच्चे हैं, जिन्हें पढ़ाने के लिए दो शिक्षिकाएं पदस्थ हैं. इन दोनों शिक्षिकाओं ने अपनी सहूलियत के लिए 100 रुपए दिहाड़ी पर स्कूल में एक महिला को पढ़ाने के लिए रखा है और खुद घर पर आराम फरमा रही हैं.

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आज शिक्षक दिवस है. इस अवसर पर अकसर काबिल और कामयाब शिक्षकों की मिसाल पेश की जाती है, लेकिन मध्‍यप्रदेश में शिक्षा मंत्री के क्षेत्र में शिक्षा व्यवस्था का क्या आलम है, यह खंडवा जिले के एक स्‍कूल की व्‍यवस्‍था से पता चलता है. यहां दो शिक्षिकाओं ने दैनिक मजदूरी पर एक महिला को पढ़ाने के लिए रख लिया है और खुद घर पर आराम फरमा रही हैं.

'चिराग तले अंधेरा' वाली कहावत तो आपने बहुत बार सुनी होगी, लेकिन हम आपको यह कहावत चरितार्थ होते दिखाते हैं. खंडवा जिले के आदिवासी अंचल खालवा का मेहलू गांव प्रदेश के शिक्षा मंत्री विजय शाह के विधानसभा क्षेत्र में आता है. यहां के प्राथमिक विद्यालय में बच्चों की शिक्षण व्यवस्था भगवान भरोसे है.

दरअसल खंडवा जिला मुख्यालय से 90 किमी दूर इस स्कूल में करीब 67 बच्चे हैं, जिन्हें पढ़ाने के लिए दो शिक्षिकाएं पदस्थ हैं. ये दोनों शिक्षिकाएं सुदूर आदिवासी अंचल होने के कारण स्कूल ही नहीं आती हैं. यहां बच्चे स्कूल आते तो हैं, लेकिन बस्ता अंदर रखकर स्कूल के बाहर खेलकर अपना समय बिताने को मजबूर होते हैं.



इन दोनों शिक्षिकाओं ने अपनी सहूलियत के लिए 100 रुपए दिहाड़ी पर स्कूल में एक महिला को पढ़ाने के लिए रखा है. जिस दिन ये महिला स्कूल नहीं आती हैं, उस दिन बच्चे ही शिक्षक बन जाते हैं और हॉलीडे मनाकर शाम तक घर चले जाते हैं. सबसे बड़ी बात यह है कि इसे देखने और जांच करने वाला अब तक कोई सामने नहीं आया.
जब इन शिक्षिकाओं की इस करतूत की जानकारी शिक्षा विभाग के अधिकारियों को दी गई तो उनका कहना था कि इस मामले में शिक्षिकाओं की इस कारस्तानी के खिलाफ जांच कर कार्रवाई की जाएगी.
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