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हाथों में तलवार और घोड़ी पर होकर सवार होकर दुल्हनें निकलीं अपने दूल्हे को लेने
Khandwa News in Hindi

Harendra Nath Thakur | News18 Madhya Pradesh
Updated: January 24, 2020, 3:42 PM IST
हाथों में तलवार और घोड़ी पर होकर सवार होकर दुल्हनें निकलीं अपने दूल्हे को लेने
खंडवा में दुल्हनों की बारात निकली

इस शादी समारोह में पर्यावरण बचाने का भी संदेश दिया गया. पाटीदार परिवार ने शादी के लिए जो निमंत्रण पत्र (Invitation card) छपवाया वो कागज की जगह रुमाल पर प्रिंट कराया गया, ताकि कागज की बर्बादी पर रोक लग सके और पेड़ कटने से बचाया जा सके.

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खंडवा. शादियां तो आपने बहुत देखी होंगी लेकिन मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) का खंडवा (Khandwa) शहर एक ऐसी शादी का गवाह बना, जहां दूल्हे की जगह दुल्हनों (Bride) ने बारात (Baraat) निकाली, और वो भी पूरे गाजे-बाजे के साथ. खंडवा में दो बहनें घोड़ी पर सवार होकर बारात लेकर विवाहस्थल पर पहुंचीं. बारात के इंतजार में मंडप में खड़े दूल्हे, दुल्हनों के पहुंचते ही बारातियों के साथ थिरकने लगे. खास बात है कि इस शादी में पर्यावरण बचाने का संदेश (Environment Protection) भी दिया गया.

गर्व करने का मिला मौका
दुल्हन बनी दोनों बहनें- साक्षी और सृष्टि पाटीदार समाज की हैं. हाथों में तलवार लिए, सिर पर साफा बांधकर घोड़ी पर बैठकर सड़कों पर नाचते-गाते अपने दोस्तों और सहेलियों के साथ वो दूल्हे के पास पहुंची. इनका अंदाज देखकर हर कोई हैरान था. वहीं मंडप में अपनी दुल्हनों का इंतजार करते दूल्हे भी बारात के पहुंचते ही झूमने लगे. दुल्हन ने कहा हमारे समाज ने हमें गर्व करने का एक मौका दिया है. पाटीदार समाज की परंपरा के मुताबिक दोनों बहनों की शादी हुई और दोनों ने गृहस्थ जीवन की शुरुआत की.

रूमाल पर छपा निमंत्रण
इस शादी समारोह में पर्यावरण को बचाने का भी संदेश दिया गया. पाटीदार परिवार ने शादी के लिए जो निमंत्रण पत्र छपवाया था, वो कागज की जगह रूमाल पर प्रिंट कराया गया, ताकि कागज की बर्बादी पर रोक लग सके और पेड़ कटने से बचाया जा सके. दरअसल रूमाल पर निमंत्रण पत्र छपवाने के पीछे जो वजह बताई गई उसके मुताबिक धुलने के बाद रूमाल से रंग निकल जाएगा और बाद में उसे उपयोग में लाया जा सकेगा.

पाटीदार समाज की परंपराखंडवा के पाटीदार समाज में बेटियों को बढ़ावा देने के लिए यह परंपरा शुरू की गई है. शादी के दौरान लड़कियां खुद घोड़े पर बैठकर जनवासे में दूल्हे के पास जाती हैं और उसे अपने साथ मंडप तक लेकर जाती हैं. यह परंपरा वर्षों से यूं ही चली आ रही है.

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First published: January 24, 2020, 2:26 PM IST
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