एक शहर और दो मां, एक का लाल लौटा, दूसरे की गोद हुई सूनी

एक शहर, दो मां, दोनों के बेटों का नाम भी एक ही संस्कार. दोनों ही अपने बेटों पर जान छिड़कती हैं. लेकिन एक ही पल में इनकी दुनिया में एक तूफान आया और सबकुछ बदल गया. एक मां ने कुछ घंटों के लिए अपने लाल को खोया तो उसके लिए तो जैसे जिंदगी ही थम गई. वहीं एक मां ने तो अपने बेटे को घर से बाहर भेजा तो वापस उसकी बस लाश ही आई.
एक शहर, दो मां, दोनों के बेटों का नाम भी एक ही संस्कार. दोनों ही अपने बेटों पर जान छिड़कती हैं. लेकिन एक ही पल में इनकी दुनिया में एक तूफान आया और सबकुछ बदल गया. एक मां ने कुछ घंटों के लिए अपने लाल को खोया तो उसके लिए तो जैसे जिंदगी ही थम गई. वहीं एक मां ने तो अपने बेटे को घर से बाहर भेजा तो वापस उसकी बस लाश ही आई.

एक शहर, दो मां, दोनों के बेटों का नाम भी एक ही 'संस्कार'. दोनों ही अपने बेटों पर जान छिड़कती हैं. लेकिन एक ही पल में इनकी दुनिया में एक तूफान आया और सबकुछ बदल गया. एक मां ने कुछ घंटों के लिए अपने लाल को खोया तो उसके लिए तो जैसे जिंदगी ही थम गई. वहीं एक मां ने तो अपने बेटे को घर से बाहर भेजा तो वापस उसकी बस लाश ही आई.

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मध्यप्रदेश के हरदा जिले में दो मां को अपने बेटों के दूर होने का गम बर्दाश्त करना पड़ा. हालांकि एक मां को तो कई घंटों बाद अपना लाल वापस मिल गया लेकिन दूसरी मां इतनी खुशकिस्मत नहीं रही.

गला घोंटकर मरने के लिए छोड़ गया किडनैपर

हरदा के छीपानेर रोड पर रहने वाले विनोद मालवीय के बेटे संस्कार का अपहरण कर उसे जान से मारने की कोशिश का मामला सामने आया है. बुधवार शाम को फुटबॉल खेल रहे संस्कार को अज्ञात व्यक्ति जन्मदिन की पार्टी का लालच देकर अपने साथ ले गया और डगावा रोड पर एक खेत में ले जाकर प्लास्टिक की रस्सी से उसका गला घोंट दिया.



इस दौरान गला दबने से संस्कार की नाक और कान से खून बहने लगा. जिससे संस्कार बेहोश हो गया. इसके बाद आरोपी उसे मरा हुआ समझ वहीं छोड़ गया.
कुछ समय बाद संस्कार को होश आया तो उसने खुद को अकेला पाया. वो उठा और रोशनी की ओर जाते हुए सड़क तक जा पहुंचा. जहां उसने रास्ते से जा रहे एक युवक को आवाज देकर आपबीती सुनाई, जिसके बाद युवक ने परिजनों को सूचित कर उसे इलाज के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया.

मामले की सूचना पुलिस को दी गई. जो गुरुवार को संस्कार को घटनास्थल पर लेकर गई और वहां का मुआयना किया. पिता का कहना है कि उनकी किसी से कोई दुश्मनी नहीं है, ऐसे में उनके बेटे के साथ किसी ने ऐसा क्यों किया ये उन्हें भी समझ नहीं आ रहा है.

वहीं रातभर से गायब अपने बेटे के मिलने के बाद संस्कार की मां की आंखों में अब परेशानी की जगह खुशी के आंसू हैं. संस्कार के मिलने के बाद बाकी परिजनों ने भी राहत की सांस ली है.

बेटे की लाश को गले से लगाई रही मां

जहां एक ओर संस्कार के लौटने से उसकी मां की जान में जान आई, वहीं हरदा में ही एक और मां की तो जैसे जिंदगी ही थम गई. छीपानेर गांव में एक पारिवारिक कार्यक्रम में शामिल होने गए परिवार पर गुरुवार को दुखों का पहाड़ टूट पड़ा.

नर्मदा नदी में परिवार के साथ नहाने के दौरान 9 साल के बच्चे संस्कार सेजकर की डूबने से मौत हो गई. वहां मौजूद लोगों ने उसे बचाने की काफी कोशिश की लेकिन नदी के बहाव में वो भी कुछ नहीं कर सके.

परिजन जब बच्चे की लाश लेकर घर पहुंचे तो उसकी मां सदमे में चली गई. वो अपने बेटे की लाश को गले से ही लगाई रही. यहां तक कि शव को अस्पताल ले जाने के दौरान भी उसने पलभर के लिए भी अपने लाल के शव को खुद से जुदा नहीं होने दिया.
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