एमपी में शराबबंदी के लिए सड़कों पर उतरेगी कांग्रेस

Congress Presindent Arun Yadav FILE PHOTO
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बिहार में शराबबंदी के बाद अपराधों की संख्या में आई गिरावट को देखते हुए मध्यप्रदेश में भी शराबबंदी की मांग जोर पकड़ने लगी है. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अरुण यादव ने प्रदेश में शराबबंदी को लेकर जनता के सहयोग से आंदोलन चलाने का एलान किया है.

  • Agencies
  • Last Updated: May 4, 2016, 3:39 PM IST
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बिहार में शराबबंदी के बाद अपराधों की संख्या में आई गिरावट को देखते हुए मध्यप्रदेश में भी शराबबंदी की मांग जोर पकड़ने लगी है.

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अरुण यादव ने प्रदेश में शराबबंदी को लेकर जनता के सहयोग से आंदोलन चलाने का एलान किया है.

यादव ने कहा कि प्रदेश में बढ़ते अपराध और हादसों के लिए शराब एक बड़ा कारण है. प्रदेश में लोग रोजाना सवा तीन लाख लीटर शराब पी जाते हैं. इतना ही नहीं, 75 फीसदी महिलाएं शराब के कारण घरेलू हिंसा की शिकार होती हैं.



उन्होंने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं में 58 फीसदी मौतें शराब के नशे के कारण होती हैं. शहरी इलाकों में 43 फीसदी लड़कियों, महिलाओं और बच्चियों के साथ छेड़छाड़ की घटनाएं शराब की वजह से होती हैं.
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने आगे कहा कि प्रदेश में मुखिया शिवराजसिंह चौहान अपने आप को प्रदेश की बहनों का भाई और भांजे-भांजियों का मामा बताते हैं, मगर महिलाओं पर होने वाले अत्याचार के मामले में प्रदेश देश में पहले नंबर पर है. बेटियां पढ़ें और आगे बढ़ें तथा महिलाएं सुरक्षित रहें, इसके लिए जरूरी है कि प्रदेश को शराब मुक्त बनाया जाए.

उन्होंने घोषणा की है कि प्रदेश में शराबबंदी को लेकर कांग्रेस विभिन्न चरणों में सड़कों पर उतरकर आंदोलन चलाएगी और सामाजिक सरोकार से जुड़े इस आंदोलन को यदि पार्टी को गैर राजनैतिक ढंग से भी संचालित करना पड़ा, तो पार्टी इसमें कोई संकोच नहीं करेगी.

यादव ने बताया कि आंदोलन के प्रथम चरण में शराबबंदी के खिलाफ प्रचार-प्रसार के लिए पोस्टर, होर्डिग, बैनर और पम्पलेट वितरित किए जाएंगे. विभिन्न सामाजिक गोष्ठियों, महिला संगठनों की बैठकों के माध्यम से सामाजिक चेतना का संचार किया जाएगा.

उन्होंने कहा कि राजनीतिक-गैर राजनीतिक संगठनों के साथ विभिन्न स्वयंसेवी संगठनों का भी इसमें सहयोग लिया जाएगा

उन्होंने बिहार में शराबबंदी के फैसले की सराहना करते हुए कहा कि पिछड़ा कहे जाने वाला बिहार प्रदेश इस सामाजिक बुराई को जड़ से खत्म करने का संकल्प लेते हुए राजस्व की चिंता किए बगैर इस दिशा में ऐतिहासिक कदम उठा चुका है. बिहार सरकार का यह कदम वर्तमान दौर में पूरे देश को दिशा प्रदान कर सकता है, तो मध्यप्रदेश को क्यों नहीं.
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