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Interesting Story: 40 साल बाद अपने परिवार से मिलेंगे सीमांचल, जानिए कैसे बिछड़े अपनों से, क्यों रहना पड़ा जेल में

Interesting Story: 40 साल बाद अपने परिवार से मिलेंगे सीमांचल, जानिए कैसे बिछड़े अपनों से, क्यों रहना पड़ा जेल में

बुरहानपुर के इस बुजुर्ग की कहानी दर्दनाक है. अब ये 40 साल बाद परिवार से मिलेंगे.

बुरहानपुर के इस बुजुर्ग की कहानी दर्दनाक है. अब ये 40 साल बाद परिवार से मिलेंगे.

OMG Story: ओडीशा के बुजुर्ग सीमांचल महापात्रा की कहानी पूरी तरह फिल्मी है. सीमांचल रोजगार के लिए गए तो मुंबई थे, लेकिन किस्मत उन्हें बुरहानपुर ले आई. वे जेल भी गए और कई तकलीफें सहीं. अब वे 40 साल बाद परिवार से मिलेंगे.

बुरहानपुर. इनसे मिलिए, ये हैं सीमांचल महापात्रा. ये बुरहानपुर तो आए जवानी में, लेकिन अपने घर जा रहे हैं बुढ़ापे में. 40 साल बाद ये अपने परिवार से मिल रहे हैं. ये बात इसलिए खास है, क्योंकि सीमांचल की रियल स्टोरी किसी भी बॉलीवुड की रील स्टोरी से कम नहीं. इनकी कहानी पूरी फिल्मी है.

बुरहानपुर की सामाजिक संस्था रोटी बैंक के संजय शिंदे और ओडीशा के सोशल वर्कर कमल राठी ने  बुजुर्ग को उनके परिवार से मिला दिया है. उनका परिवार उन्हें अपनाने के लिए राजी हो गया है. परिवार के सदस्य उन्हें लेने जल्द बुरहानपुर आएंगे.

इस तरह चला बुजुर्ग का सफर

रोटी बैंक के संजय शिंदे ने बताया कि सीमांचल महापात्रा के साथ किस्मत ने अजीब खेल खेला. गैर हिंदी भाषी यह शख्स जवानी में एक ठेकेदार के कहने पर कुछ साथियों के साथ रोजगार के लिए मुंबई आया. ठेकेदार का काम पूरा हुआ तो उसने अचानक उन्हें गांव जाने को कहा. किराए के लिए पैसे भी नहीं थे. जैसे-तैसे रेलगाड़ी में सवार हुए. सहयात्रियों ने पूछा कहा जाना है तो उन्होंने बताया बैहरामपुर, जो ओडीशा में है. लेकिन, बीच में भुसावल के बाद एमपी का बुरहानपुर स्टेशन आया तो सहयात्रियों ने उन्हें बुरहानपुर स्टेशन उतार दिया.

जेल गए, भूखे रहे, गर्दन भी टेढ़ी हो गई

संजय के मुताबिक, चूंकि सीमांचल विदाउट टिकट यात्रा कर रहे थे तो रेल विभाग ने पकड़ लिया. जुर्माना अदा न करने के उन्हें जेल भी हो गई. ठीक से हिंदी नहीं बोल पाने और स्थानीय लोगों द्वारा उड़िया भाषा की समझ नहीं होने के चलते उस समय किसी ने कोई मदद नहीं की. पुलिस ने भी छोड़ दिया. तब से ऐसे ही मजदूरी, चौकीदारी करके ये जीवन बिताते गए और अपने लोगों को याद कर-करके रोते रहे. इस दौरान किसी के यहां काम करने के दौरान बैलगाड़ी का पहिया गर्दन के ऊपर से निकल गया, जिसकी वजह से गर्दन टेढ़ी हो गई.

इस तरह शुरू हुई कोशिश

बुजुर्ग-बेसहारा लोगों को टिफिन मुहैया कराने वाले रोटी बैंक के मैनेजर संजय शिंदे एक साल पहले सीमांचल के संपर्क में आए. वे उन्हें भी टिफिन देते थे. संयज को उनकी समस्या कुछ-कुछ समझ में आई. संजय ने उन्हें परिवार से मिलाने की कोशिश शुरू की. उन्होंने जिला प्रशासन की मदद ली और आयुर्वेद कॉलेज में पदस्थ उड़िया जानने वाले प्रोफेसर को बुलाया. प्रोफेसर ने सीमांचल से बात कर की. तब पता चला कि वे ओडीशा के अंगुल जिले के तिकरापारा गांव के निवासी हैं.

परिवार से मिलने का रस्ता साफ

इस दौरान शहर के टेक्सटाईल कारोबारी सुरेश सोनी रोटी बैंक में दान देने आए. उन्होंने बताया कि उनके रिश्तेदार कमल राठी कटक में हैं. कमल राठी संपर्क किया गया और सीमांचल महापात्रा का फोटो, वीडियो, गांव का पता भेजा. कमल राठी ने ओडीशा प्रशासन से मदद लेकर जानकारी जुटाई और वह परिवार तक पहुंचे. कमल राठी ने उनके परिवार को बुजुर्ग को अपनाने के लिए राजी किया. इसके लिए यात्रा का टिकट भी बुक कराया. अब 13 जुलाई की रात को सीमांचल के परिजन बुरहानपुर पहुंचेगे और 14 जुलाई को 40 साल बाद अपने परिवार से मिलेंगे.

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