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प्रकृति प्रेमः विकास की राह में आ रहे बुज़ुर्ग पीपल को दी नयी जिंदगी,15 किमी दूर किया ट्रांसप्लांट

पर्यावरण प्रेमी रितेश गोयल ने पीपल के पेड़ को कटने से बचा लिया. ट्री ट्रांसप्लांट के जरिए उसे दूसरी जगह शिफ्ट करवाके लगाया.

पर्यावरण प्रेमी रितेश गोयल ने पीपल के पेड़ को कटने से बचा लिया. ट्री ट्रांसप्लांट के जरिए उसे दूसरी जगह शिफ्ट करवाके लगाया.

Nature love. मध्यप्रदेश के खंडवा में 75 साल पुराने पीपल के पेड़ को कटने से बचाने के लिए उसे दूसरी जगह ट्रांसप्लांट करा ...अधिक पढ़ें

खंडवा. कोरोना संक्रमण के दौरान ऑक्सीजन की किल्लत से भला कौन वाकिफ नहीं होगा. ऐसे में चौबीसों घंटे ऑक्सीजन देने वाले पीपल के पेड़ का महत्व खंडवा के एक प्रकृति प्रेमी ने समझा और 75 साल पुराने पीपल के एक पेड़ को कटने से बचा लिया. पेड़ को दूसरी जगह लगा दिया गया. ये पेड़ विकास की राह में आड़े आ रहा था.  खंडवा में कॉलोनी के निर्माण में पीपल के पेड़ के कारण रुकावट आ रही थी. इसके लिए पर्यावरण प्रेमी रितेश गोयल ने पेड़ बचाने के लिए लाखों रुपए खर्च कर उस पीपल को ट्री ट्रांसप्लांट के जरिए दूसरी जगह शिफ्ट करा दिया. इतना ही नहीं पीपल के पेड़ की शोभायात्रा बैंड बाजे के साथ निकाली गई.

बुढ़ापे में अक्सर बुजुर्गों को घर से बाहर निकालकर वृद्धाश्रम भेजने के कई किस्से आपने सुने होंगे. लेकिन खंडवा में एक ऐसा भी शख्स है, जिसने एक 75 साल के बुजुर्ग को वृद्धाश्रम नहीं बल्कि नई संजीवनी देने के लिए खुद के लाखों रु खर्च कर नया जीवन लौटाया है. बात हो रही है इस 75 साल पुराने पीपल के पेड़ की. खंडवा के अंजनी टॉकीज के पास स्थित इस पेड़ के कारण कॉलोनी निर्माण की प्रक्रिया में अड़ंगा होने से इसे काटने की नौबत आ गई थी.

ट्री ट्रांसप्लांट की टीम बुलाकर पीपल की शिफ्ट कराया गया 
ऐसे में शहर के पर्यावरण प्रेमी रितेश गोयल ने जिला प्रशासन से परमिशन लेकर लोगों की भावनाओं का सम्मान करते हुए अपने खुद के खर्चे से हैदराबाद से ट्री ट्रांसप्लांट की टीम बुलवाकर इसे अन्यत्र शिफ्ट करवाने की तैयारी शुरू कर दी. स्थानीय सैकड़ों ऐसे लोग थे जिनकी इस पेड़ के प्रति वर्षों से अगाध सहानुभूति थी. जिनका खुद का बचपन के साथ साथ उनकी तीन-तीन पीढ़ियों का भी बचपन इस पेड़ की छांव में बीता. ऐसे में स्थानीय लोगों की भावनाओं का सम्मान करते हुए हैदराबाद की टीम ने एक माह तक प्रत्यारोपण की प्रक्रिया कर इसे ट्रांसप्लांट के लिए तैयार किया.

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बैंड-बाजे के साथ निकाली शोभा यात्रा 
पेड़ को बैंड-बाजे के साथ शहर से 15 किलोमीटर दूर शिफ्ट करने के लिए ले जाया गया. शिफ्टिंग की प्रक्रिया में रात हो गई.  रात में प्रक्रिया पूरी होने के बाद शहर भर में डीजे की धुन के साथ इस पीपल के पेड़ की शोभा यात्रा निकाली गई. बहरहाल, जीवन भर जिस पेड़ ने लोगों की संजीवनी प्रदान की उसे जिस संजीदगी के साथ नया जीवन देने की कोशिश की जा रही है वह पर्यावरण की रक्षा के साथ साथ मानवता की भी अनूठी मिसाल है.

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