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खंडवा: गांव वालों के तानों को लिया चैलेंज, पुनाई बनी पहली महिला पटवारी
Khandwa News in Hindi

Harendra Nath Thakur | News18 Madhya Pradesh
Updated: May 29, 2019, 3:19 PM IST

खंडवा में एक दिव्यांग लड़की ने गांव वालों के ताने को चैलेंज के रूप में लेकर न सिर्फ अपनी पढ़ाई पूरी की बल्कि सरकारी नौकरी तक हासिल की.

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कहते हैं अगर सपनों को पूरा करने की ललक हो और हौसले बुलंद हो तो कामयाबी आपके कदम चूमती है. ताजा मामला मध्य प्रदेश के खंडवा जिले की है. यहां की एक दिव्यांग लड़की ने गांव वालों के ताने से परेशान होकर न सिर्फ अपनी पढ़ाई पूरी की बल्कि सरकारी नौकरी तक हासिल कर ली है. अब वह गांव वालों को धन्यवाद देने के लिए गांव में जश्न का आयोजन करने की ठानी है. उसका कहना है कि गांव वालों के ताने ही उसकी तरक्की का सबसे बड़ा कारण हैं. उनके तानों से ही तंग आकर उसने जिंदगी में कुछ ऐसा करने की ठानी, जिससे आज सबकी बोलती बंद हो गई है. दरअसल, अपनी कड़ी मेहनत से आज इस दिव्यांग लड़की ने पटवारी की नौकरी हासिल कर कर ली है.

सरकारी नौकरी पाने वाली गांव की पहली लड़की

खंडवा में हरसूद के चारखेडा गांव की रहने वाली पुनई मंडराई ने शासकीय सेवा में आने से पहले संघर्ष भरा जीवन गुजारा है. दिव्यांग पुनई मंडराई अपने चारखेडा गांव की एक मात्र लड़की है, जिसे पटवारी के तौर पर सरकारी नौकरी मिली है. फरवरी माह से 3 महीने की ट्रेनिंग के बाद उसे खंडवा के खालवा में पदस्थ किया गया है.

ताने मारते थे गांव वाले, पर पुनई ने हार नहीं मानी



मजदूर मां-बाप की बेटी पुनई मंडराई जब गांव से पढ़ाई के लिए खंडवा आती थी, तब गांव वाले उसकी गरीबी के साथ-साथ लड़की होने के कारण पढ़ाई के नाम पर शहर की सैर सपाटे करने जैसे ताने तक मारते थे. गांव वालों के ताने से पुनई के हौसलों को और भी बल मिलता था. पुनई ने मैथमेटिक्स से बीएससी और हिंदी से एमए की पढ़ाई की है. पढ़ाई पूरी करने के बाद पुनई का चयन पटवारी के लिए कर लिया गया. अब पुनई ने अपनी इस खुशियों को अकेले नहीं बल्कि ग्रामीणों के साथ सहभोज कर मनाना चाहती है. ताकि ग्रामीणों को यह संदेश जाए कि बेटियां बेटे से किसी भी क्षेत्र में कम नहीं हैं. पुनई मंडराई ने मंगलवार को कलेक्ट्रेट पहुंचकर कलेक्टर समेत समस्त राजस्व विभाग के अधिकारियों को भी आमंत्रित किया है.

पुनई को रोल मॉडल बनाने की तैयारी

अब पुनई अपने गरीबी के दिनों को याद नहीं करना चाहती, बल्कि ग्रामीण परिवेश में हासिल अपनी सफलता को याद कर आगे बढ़ना चाहती है. इधर, खंडवा कलेक्टर पुनई को रोल मॉडल बनाकर उसे सरकारी शिक्षण संस्थानों में प्रस्तुत करने की तैयारी में जुट गए हैं. ताकि ग्रामीण क्षेत्र से आने वाली लड़कियां अपने को कमतर न समझें.

बहरहाल, किसी शायर ने पुनई जैसी संघर्षशील को देखकर ठीक ही कहा है कि 'अगर देखना है मेरे हौसले की उड़ान तो आसमां से कह दो थोड़ा और ऊंचा हो जाए.'

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First published: May 29, 2019, 3:08 PM IST
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