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सात हजार की आबादी का एक ऐसा गांव, जहां मजाल कि कोई शराबी मिल जाए
Khandwa News in Hindi


Updated: January 30, 2017, 11:45 AM IST
सात हजार की आबादी का एक ऐसा गांव, जहां मजाल कि कोई शराबी मिल जाए
देशभर में शराबबंदी को लेकर चल बहस के बीच मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले का एक गांव सबके लिए मिसाल बना हुआ है. इस गांव में आजादी के बाद से अब तक शराब की एक भी दुकान नहीं खुली है. महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर आज न्यूज18 हिंदी आपको इस विशेष गांव के बारे में बताने जा रहा है.

देशभर में शराबबंदी को लेकर चल बहस के बीच मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले का एक गांव सबके लिए मिसाल बना हुआ है. इस गांव में आजादी के बाद से अब तक शराब की एक भी दुकान नहीं खुली है. महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर आज न्यूज18 हिंदी आपको इस विशेष गांव के बारे में बताने जा रहा है.

  • Last Updated: January 30, 2017, 11:45 AM IST
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देशभर में शराबबंदी को लेकर चल बहस के बीच मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले का एक गांव सबके लिए मिसाल बना हुआ है. इस गांव में आजादी के बाद से अब तक शराब की एक भी दुकान नहीं खुली है. महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर आज न्यूज18 हिंदी आपको इस विशेष गांव के बारे में बताने जा रहा है.

बुरहानपुर जिला मुख्यालय से महज 7 किलोमीटर दूर महाराष्ट्र सीमा पर बसे लोनी गांव में आजादी के बाद से अब तक शराब दुकान खोले जाने की अनुमति नहीं दी गई. नई ग्राम पंचायत ने पिछले साल इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए गांव में एक भी शराब दुकान नहीं खोलने के प्रस्ताव का मसौदा तैयार किया था, जिस पर अमल जारी है.

पंचायत राज का 'आदर्श मॉडल'

पंचायत राज व्यवस्था लागू होते ही गांव के जागरूक नागरिकों ने यह तय किया कि गांव में एक भी शराब दुकान नहीं खोलने दी जाएगी. ग्रामीणों ने यह कड़ा फैसला शराब से होने वाले नुकसानों को ध्यान में रखकर किया और सालों पहले शुरू हुई यह परंपरा अब भी जारी है.

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एक व्यक्ति का 'गलत आचरण', पूरा परिवार बर्बाद

सात हजार के आबादी वाले लोनी गांव में ज्यादातर ग्रामीण खेतिहर मजदूर हैं. ग्रामीणों का मानना है कि शराब के सेवन से परिवार बर्बाद और दुखी होता है. परिवार का एक व्यक्ति शराब पीता है, लेकिन प्रभावित पूरा परिवार होता है.अवैध शराब के खिलाफ संयुक्त मुहिम

ऐसे में गांव में अगर अवैध शराब की बिक्री होती है, तो सभी ग्रामीण एकजुट होकर इसके खिलाफ मुहिम छेड़ कर उस पर रोक लगाते हैं. गांववालों का मानना है कि गांव में नशामुक्ति अभियान के चलते शराब की दुकान नहीं होने से सबसे ज्यादा फायदा महिलाओं और युवाओं को होता है. इससे परिवार में होने वाले विवाद और युवाओं को राह से भटकने से रोकने में काफी मदद मिली है.

बुरहानपुर से शारिक अख्तर दुर्रानी की रिपोर्ट

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First published: January 30, 2017, 9:15 AM IST
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