स्कूली छात्राओं ने की निमाड़ी लोक संस्कृति को बचाने की पहल
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स्कूली छात्राओं ने की निमाड़ी लोक संस्कृति को बचाने की पहल
गोबर से बनी आकृतियां

निमाड़ी संस्कृति संझा-फुली को जीवंत कर फिर से प्रचलन में लाने के लिए खंडवा के स्कूल और कॉलेज की लड़कियां मिलकर अपने-अपने कॉलेज परिसर में संझा-फुली का आयोजन कर रही है.

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एक-एक कर समाप्त हो रही स्थानीय संस्कृतियों के बीच मध्य प्रदेश में स्कूली लड़कियों ने स्थानीय संस्कृति को बचाने की अनूठी पहल की है. निमाड़ी संस्कृति संझा-फुली को जीवंत कर फिर से प्रचलन में लाने के लिए खंडवा के स्कूल और कॉलेज की लड़कियां मिलकर अपने-अपने कॉलेज परिसर में संझा-फुली का आयोजन कर रही है.

तेजी से बदलते आधुनिक परिवेश में एक तरफ जहां वर्तमान पीढ़ी सामजिक संस्कृति से दूर होती जा रही है. वहीं दूसरी ओर स्थानीय संस्कृति के संरक्षण के लिए खंडवा में स्कूल और कॉलेज की छात्राएं बढ़कर हिस्सा ले रही हैं. खंडवा के कॉलेजों में लोक संस्कृति संझा-फुली का आयोजन कर इसे प्रचलन में लाने की कोशिश की जा रही है. स्थानीय लोग लड़कियों के इस पहल की काफी सराहना कर रहे हैं.

पहले श्राद्ध पक्ष में 16 दिनों तक निमाड़ में कुँवारी कन्याएं बड़े ही धार्मिक तरीके से संझा-फुली मनाती थी. इस दौरान गाय के गोबर से विभिन्न आकृतियां बनाकर पूजा किया जाता था, लेकिन अब निमाड की यह संस्कृति धीरे-धीरे लुप्त होती जा रही है. ऐसे में खंडवा जी.डी.सी. कॉलेज की छात्राओं ने संझा-फुली का कॉलेज परिसर में आयोजन किया. छात्राओं ने सांझी फुली के साथ ही मतदाता जागरूकता के सन्देश भी दिया.



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