आज भी गांव में नहीं पहुंची उज्ज्वला योजना, सरकार थपथपा रही है पीठ
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आज भी गांव में नहीं पहुंची उज्ज्वला योजना, सरकार थपथपा रही है पीठ
धुएं के बीच खाना पकाती महिला

खालवा में सफलतापूर्व योजना लागू होने के बाद भी स्कूलों, आंगनबाड़ियों में खाना बनाने वाली महिलाएं आज भी लकड़ी चूल्हों पर खाना बनाने के लिए मजबूर है. एक तरफ जिला प्रशासन उज्ज्वला योजना के क्रियान्वयन के दावे कर रही है, वहीं दूसरी तरफ ये महिलाएं है जो धुएं व घुटन के बीच खाना बना रही है.

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चुनावी साल में प्रदेश सरकार के साथ ही केंद्र सरकार अपनी-अपनी योजनाओं का जमकर इस्तेमाल कर रहे हैं, लेकिन योजनाएं की जमीनी हकीकत कुछ और ही है. केंद्र सरकार की महत्वकांक्षी उज्ज्वला योजना मध्यप्रदेश के खंडवा में दम तोड़ रही है. योजना की सफलता को लेकर सरकारें अपनी पीठ थपथपा रही हो, लेकिन ग्रामीण अंचलों में आज भी लकड़ी और चूल्हे के इस्तेमाल से ही भोजन पकाया जा रहा है.

खंडवा जिले के आदिवासी अंचल खालवा में उज्ज्वला योजना का सफलता पूर्वक क्रियान्वयन कर लिया गया है. खालवा सीईओ सुरेश टेमने का कहना है कि उज्ज्वला योजना के तहत प्रशासन ने बहुत अच्छा काम किया है. प्रशासन ने अब तक करीब सात हजार से ज्यादा गैस कनेक्शन लाभार्थियों को दिया है. खालवा के एक हजार से ज्यादा आबादी वाले गांवों में इस योजना को कवर किया गया है.

खालवा में सफलतापूर्व योजना लागू होने के बाद भी स्कूलों, आंगनबाड़ियों में खाना बनाने वाली महिलाएं आज भी लकड़ी चूल्हों पर खाना बनाने के लिए मजबूर है. एक तरफ जिला प्रशासन उज्ज्वला योजना के क्रियान्वयन के दावे कर रही है, वहीं दूसरी तरफ ये महिलाएं है जो धुएं व घुटन के बीच खाना बना रही है. इन महिलाओं का कहना है कि कई बार प्रशासन से गुहार लगाने के बाद भी इन्हें गैस कनेक्शन नहीं मिला.



प्रदेश में ऐसे एक दो नहीं बल्कि सैंकड़ों महिलाएं है जो मध्याह्न का भोजन लकड़ी चूल्हे पर पकाती है. बहरहाल जिला प्रशासन की आंखों पर चढ़ी धूल को झाड़कर योजना की जमीनी हकीकत जानने की आवश्यकता है, ताकि हितग्राहियों को इसका लाभ मिल सकें.
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