जल विद्युत गृह के टेंडर घोटाले में निजी फर्म संचालक को तीन साल की सजा
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जल विद्युत गृह के टेंडर घोटाले में निजी फर्म संचालक को तीन साल की सजा
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विशेष सीबीआई अदालत ने मध्यप्रदेश के खंडवा जिले स्थित इंदिरा सागर जल विद्युत गृह के टेंडर घोटाले में एक निजी फर्म के संचालक को तीन साल के सश्रम कारावास और 30,000 रुपये के जुर्माने की सजा सुनायी.

  • Agencies
  • Last Updated: December 31, 2016, 7:57 PM IST
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विशेष सीबीआई अदालत ने मध्यप्रदेश के खंडवा जिले स्थित इंदिरा सागर जल विद्युत गृह के टेंडर घोटाले में एक निजी फर्म के संचालक को तीन साल के सश्रम कारावास और 30,000 रुपये के जुर्माने की सजा सुनायी.

विशेष सीबीआई न्यायाधीश बीके पालोदा ने नागपुर की एक निजी फर्म के संचालक राजेंद्र सकरे को भारतीय दंड विधान की धारा 420-बी, 468 और 471 के तहत दोषी करार दिया.

सीबीआई के एक अधिकारी ने इंदौर में बताया कि सरकारी अधिकारियों की मिलीभगत और आपराधिक साजिश के तहत सकरे की फर्म के नाम इंदिरा सागर जल विद्युत गृह के टेंडर जाली दस्तावेजों के बूते जारी किये गये. ऐसा करते वक्त न तो इन दस्तावेजों की असलियत जांचने की जहमत उठायी गयी, न ही नियम-कायदों के तहत उचित तकनीकी मूल्यांकन कराया गया.



उन्होंने बताया कि सीबीआई ने इस टेंडर घोटाले में सकरे और इंदिरा सागर जल विद्युत गृह के तीन अधिकारियों के खिलाफ 22 अगस्त 2014 को प्राथमिकी दर्ज की थी.
इंदिरा सागर जल विद्युत गृह एनएचडीसी लिमिटेड चलाती है, जो एनएचपीसी लिमिटेड और मध्यप्रदेश सरकार का साझा उपक्रम है.

 
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