महिला अधिकारी ने दिखाई सोशल मीडिया की ताकत, बिछड़े परिवार को मिलाया

मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में एक महिला अधिकारी ने सोशल मीडिया की ताकत दिखाते हुए एक बिछड़ी हुई मूक- बधिर महिला को उसके परिवार को मिलावा दिया.

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सोशल मीडिया की ताकत का इस्तेमाल करके खंडवा में एक महिला अधिकारी ने एक मूक-बधिर महिला को उसके बिछड़े परिवार से मिलवा दिया. खंडवा की महिला बाल विकास अधिकारी अंशुबाला मसीह ने विदिशा जिले की रहने वाली तुरसा बाई के लिए व्यक्तिगत स्तर पर प्रयास कर यह सफलता पाई है. साल भर पहले भोपाल से गलत ट्रेन में बैठकर भटकते हुए ये महिला खंडवा रेलवे स्टेशन आ गई थी. मूक-बधिर होने के कारण ये कुछ भी बताने में असमर्थ थी. लिहाजा जीआरपी पुलिस ने इस महिला को खंडवा स्थित बेसहारा महिला आश्रम संस्था में भेज दिया था.

आश्रम में यह महिला अपने तीन बच्चों के होने का सिर्फ इशारा कर पाती थी और रोती रहती थी. खंडवा की महिला बाल विकास अधिकारी अंशुबाला मसीह चार दिन पूर्व आश्रम की जांच के लिए गईं तो इस महिला की केस हिस्ट्री को देखा. उसके बाद मसीह ने इस पीड़ित महिला को उसके परिवार से मिलवाने की ठानी. मसीह ने प्रदेश भर के महिलाबाल विकास, आंगनबाड़ी के ग्रुपों में इस महिला की तस्वीर एवं अपना मोबाइल नम्बर देकर उसे सोशल मीडिया पर पोस्ट किया. चौबीस घंटे में ही विदिशा जिले आमखेडा गांव के एक पुजारी का फोन आया कि वो इस महिला को पहचानता है.

उस पुजारी ने गुमशुदा महिला के परिजनों को महिला बाल विकास अधिकारी से अपने मोबाइल पर बात कराई. गुमशुदा महिला के परिजन अगले दिन ही सारे दस्तावेज लेकर खंडवा महिला बाल विकास विभाग पहुंचे. फिर क्या था अधिकारी ने महिला को उसके परिजनों से मिलवाया. वर्षों से अपने पति, बच्चों और पिता से बिछड़ी मूक-बधिर महिला परिजनों को देखकर खुशी से झूम उठी. महिला के पति टीकाराम मीणा ने बताया कि सालभर से सभी उसे ढूंढ रहे थे. आज उसकी पत्नी सोशल मीडिया के माध्यम से मिल गई है. बहरहाल, सोशल मीडिया ने एक बार फिर सिद्ध कर दिया है कि अगर इसका सही उपयोग किया जाए तो बहुत काम की चीज है.



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