नोटबंदी के टेंशन के बीच कायम हुई मानवता की मिसाल, मासूम के लिए खुद बैंक पहुंचा अस्पताल
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नोटबंदी के टेंशन के बीच कायम हुई मानवता की मिसाल, मासूम के लिए खुद बैंक पहुंचा अस्पताल
नोटबंदी के बाद बैंक में लाइन लगाए खड़े लोगों के बीच हो रहे झगड़े और मौतों जैसे कई प्रकरण सामने आ रहे हैं, लेकिन इस बीच एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने टेंशन के इस माहौल के बीच मानवता की मिसाल पेश की है.

नोटबंदी के बाद बैंक में लाइन लगाए खड़े लोगों के बीच हो रहे झगड़े और मौतों जैसे कई प्रकरण सामने आ रहे हैं, लेकिन इस बीच एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने टेंशन के इस माहौल के बीच मानवता की मिसाल पेश की है.

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नोटबंदी के बाद बैंक में लाइन लगाए खड़े लोगों के बीच हो रहे झगड़े और मौतों जैसे कई प्रकरण सामने आ रहे हैं, लेकिन इस बीच एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने टेंशन के इस माहौल के बीच मानवता की मिसाल पेश की है.

दरअसल, ये मामला एमपी के खरगोन जिले का है, जहां मासूम की जान बचाने के खातिर बैंक खुद अस्पताल जा पहुंचा.

जानकारी के मुताबिक, जिले के मुल्लान्वाड़ी निवासी जयप्रकाश दीक्षित अपने 8 वर्षीय बेटे यश की तबियत खराब होने पर उसे निजी अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने स्थिति को देखते हुए बच्चे को भर्ती करने के लिए कहा.

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यश को भर्ती करवाने के बाद पैसों के इंतजाम के लिए पिता जयप्रकाश बैंंक ऑफ इंडिया पहुंचे लेकिन वहां लंबी कतार लगी हुई थे. जयप्रकाश को पैसों की तत्काल जरूरत थी, ऐसे में उन्होंने कर्मचारी से बैंक मैनेजर राजेश भोजवानी का नंबर ले लिया.



परेशान पिता ने मैनेजर को फोन लगाया और स्थिति से अवगत करवाते हुए सहायता मांगी. इस पर राजेश भोजवानी ने जयप्रकाश को अस्पताल में ही रहने के लिए कहकर मदद का आश्वासन दिया.

कुछ ही देर में मैनेजर राजेश खुद अस्पताल पहुंचे और जयप्रकाश से वहीं पर विड्रॉल फॉर्म भरवाते हुए उन्हें बच्चे के इलाज के लिए जरूरत की राशि प्र्रदान की.

बैंक मैनेजर के इस कदम से परिवार भावुक हो गया और उनका धन्यवाद दिया, वहीं बाकि लोगों ने भी राजेश भोजवानी की सराहना की.
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