करगिल विजय दिवस: पत्नी से कहकर गए थे- बच्चे के जन्म पर आऊंगा लेकिन आया संदेश

एक बार राजेन्द्र से बहन राधा ने राखी पर आने के लिए कहा तो राजेन्द्र ने उन्हें चिट्ठी में लिखा- गर्दन से प्यारा मेरा गांव है और दिल से प्यारा देश है. इन सब की रक्षा करना ही मेरा उद्देश्य है.

News18 Madhya Pradesh
Updated: July 26, 2019, 9:46 PM IST
करगिल विजय दिवस: पत्नी से कहकर गए थे- बच्चे के जन्म पर आऊंगा लेकिन आया संदेश
लांस नायक शहीद राजेन्द्र यादव की बेटी
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Updated: July 26, 2019, 9:46 PM IST
करगिल युद्ध में खरगोन के लांस नायक राजेंद्र यादव भी शहीद हुए थे. ड्यूटी पर जाने से पहले वो अपनी गर्भवती पत्नी से वादा करके गए थे कि अब वो अपने बच्चे को देखने आएंगे. वो तो नहीं आए...उनकी जगह शहादत का संदेश आया. लांस नायक राजेन्द्र यादव 30 मई 1999 को 15 हजार फीट की ऊंचाई पर तोतोलिंग पोस्ट पर युद्ध के दौरान शहीद हुए थे.

न इंतेज़ार करो इनका ऐ अज़ा-दारो
शहीद जाते हैं जन्नत को, घर नहीं आते...
राजेंद्र यादव के परिवार के लिए ये शेर सच साबित हुआ. राजेंद्र की आखिरी बार घर आना आज भी परिवार की यादों में ताज़ा है. वो बीए की परीक्षा देने खरगौन आए थे.उनकी पत्नी प्रतिभा तब 3 महीने की गर्भवती थीं. उसी दौरान अचानक सूचना आयी और वो करगिल युद्ध के बारे में परिवार को बताए बिना ड्यूटी के लिए रवाना हो गए. वो 13 मई 1999 को खरगौन से रवाना हुए और 14 मई को भोपाल में अपने बहन से 2 मिनट की मुलाकात करते हुए अपने अंतिम सफर के लिए रवाना हो गए. 30 मई 1999 को राजेंद्र 15 हज़ार फीट की ऊंचाई पर तोलोलिंग पोस्ट पर कब्जे के दौरान युद्ध लड़ते हुए शहीद हो गए.

शहीद राजेन्द्र यादव की बहन


बेटी का सपना
लांस नायक राजेन्द्र यादव की शहादत के 6 महीने बाद उनकी बेटी मेघा का जन्म हुआ. वो अब 20 साल की है. पिता की फोटो देखते हुए बड़ी हुई मेघा भी सेना में जाना चाहती है. शहीद की पत्नी प्रतिभा बताती हैं कि मेघा के पिता ने कहा था कि होने वाला बच्चा भी सेना में ही जाएगा. मेघा अपने पिता की इच्छा पूरी करना चाहती हैं. वो एनसीसी कैडेट हैं.
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पत्र लिखने का शौक था
शहीद राजेंद्र को चिट्ठी लिखने का शौक था. वो नियमित तौर पर सबको चिट्ठी लिखते थे. बहन राधा यादव याद करती हैं कि देर से रिप्लाय देने पर राजेन्द्र नाराज़ हो जाते थे. श्रीलंका में शांति सेना के वक्त जब राजेंद्र का दो महीने पत्र नहीं आया तो मां बैचेन हो गयीं और तब मैंने राजेंद्र के पुराने पत्र को नया बातक पढ़कर सुना दिया.

शहीद राजेन्द्र को चिट्ठी लिखने का शौक था


बहन से कहा था...
एक बार राजेन्द्र से बहन राधा ने राखी पर आने के लिए कहा तो राजेन्द्र ने उन्हें चिट्ठी में लिखा-गर्दन से प्यारा मेरा गांव है. और दिल से प्यारा देश है. इन सब की रक्षा करना ही मेरा उद्देश्य है. (खरगौन से आशुतोष पुरोहित के साथ भोपाल से सोनिया राणा की रिपोर्ट)

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First published: July 26, 2019, 7:43 PM IST
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