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नवरात्रि 2022 : यहां 404 साल से पूरी रात लगता है भक्ति का मेला, खप्पर लेकर निकलते हैं भक्त

खरगोन में अष्टमी की रात खप्पर निकालने की परंपरा पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही है.

खरगोन में अष्टमी की रात खप्पर निकालने की परंपरा पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही है.

Navratri. सिद्धनाथ महादेव मंदिर परिसर में भक्तों की भीड उमड़ती है. महाअष्टमी पर गरबा खेलने वालों के साथ मां के भजनों स ...अधिक पढ़ें

हाइलाइट्स

404 साल पुरानी परंपरा आज भी चलाई जा रही है.
सवारी में श्रृद्धालु रात के दो बजे से लेकर सुबह के साढ़े पांच बजे तक भक्ति में सराबोर रहते हैं.
सवारी में हजारों लोगों की भीड़ जुड़ती है.

खरगोन. नवरात्रि पर श्रद्धा और आस्था के अनेक रंग दिखते हैं. खरगोन में अष्टमी के दिन माता के खप्पर निकालने की परंपरा है. यहां के भावसार क्षत्रिय समाज में लगभग 404 साल से ये परंपरा चली आ रही है. खरगोन में नवरात्रि के पर्व के पर महाआष्टमी की मध्यरात्रि और नवमी की सुबह तक मां अम्बे की खप्पर की सवारी निकाली जाती है. इस दौरान श्रदालुओं का जन सैलाब उमडता है. लोग पूरी रात जगकर इस उत्सव में शामिल होते हैं.

पूरी रात भक्ति में डूबे रहते हैं श्रदालु 
यहां के सिद्धनाथ महादेव मंदिर परिसर में भक्तों की भीड उमड़ती है. महाअष्टमी पर गरबा खेलने वालों के साथ मां के भजनों से परिसर गूंज उठाता है. रात 2 बजे से सुबह साढ़े 5 बजे तक हजारों श्रदालु भक्ति में सराबोर नजर आते हैं. महिलाएं भी बड़ी संख्या में धार्मिक आयोजन में शामिल रहती हैं. बदलते समय के साथ नवरात्र में महाअष्टमी और महानवमी की मध्यरात्री में माता खप्पर निकलने की विरासत में मिली परम्परा को चलाया जा रहा है. एक हाथ में जलता हुआ खप्पर और एक हाथ में तलवार लेकर सवारी पर मां अम्बे निकलती हैं.

ढ़ोलक, झांन-मंजीरा के साथ निकालते हैं माता की सवारी 
माता के खप्पर की सवारी निकलने और इसका मंचन करने का काम पीढ़ियों से किया जा रहा है. लोग परंपरा को जिंदा रखने अपने बच्चों को पीढ़ी दर पीढ़ी सिखाते हैं. मां अम्बे की सवारी निकलने के दौरान अद्भुत नजारा दिखाई देता है. खप्पर लेकर निकली माता के विकराल रूप को शांत करने में लोगों के पसीने छूट जाते हैं. नवरात्रि के पर्व के दौरान महाआष्मी और नवमी पर शहर में उत्साह का माहौल रहता है. मां अम्बे की खप्पर सवारी के दौरान गरबियों की प्रस्तुति ढोलक, झान-मंजीरा, इसके साथ ही साउंड सिस्टम के साथ होती है. यह उत्सव बहुत ही हर्ष और उल्लास के साथ मनाया जाता है.

Tags: Latest News, Madhya Praesh, Navratri Celebration, Save tradition

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