कृत्रिम पैर के सहारे 15 हजार किलोमीटर की साइकिल यात्रा पर निकले प्रदीप

मन मे हो विश्वास तो दिव्यांगता भी कही आडे़ नही आती है. इंदौर के युवा प्रदीप सेन यह साबित कर रहे हैं . एक ट्रेन हादसे मे आपना पूरा पैर गांवा चुके प्रदीप आर्टिफिशियल पैर के सहारे 15 हजार किलोमीटर की 240 दिन की साइकिल यात्रा पर निकले हैं.

Ashutosh Purohit | ETV MP/Chhattisgarh
Updated: November 27, 2017, 7:13 PM IST
कृत्रिम पैर के सहारे 15 हजार किलोमीटर की साइकिल यात्रा पर निकले प्रदीप
प्रदीप सेन, दिव्यांग साईकिल यात्री फोटो- ईटीवी
Ashutosh Purohit | ETV MP/Chhattisgarh
Updated: November 27, 2017, 7:13 PM IST
मन मे हो विश्वास तो दिव्यांगता भी कही आडे़ नही आती है. इंदौर के युवा प्रदीप सेन यह साबित कर रहे हैं . एक ट्रेन हादसे मे आपना पूरा पैर गांवा चुके प्रदीप आर्टिफिशियल पैर के सहारे 15 हजार किलोमीटर की 240 दिन की साइकिल यात्रा पर निकले हैं.

खरगोन पहुंचे दिव्यांग प्रदीप ने एक खास बातचीत मे बताया कि साइकिल यात्रा के तहत वह 29 राज्यों में जाएंगे. यात्रा का उद्देश्य  पर्यावरण, दिव्यांग हित और स्वच्छता को लेकर प्रेरणा देना है. शारीरिक अक्ष्मता को कोई कमजोरी नही समझे यह लोगो को संदेश दे रहे है.

खास बात यह है की अब तक 10 हजार किलोमीटर तक ही किसी भी दिव्यांग ने साइकिल यात्रा की है. प्रदीप 15 हजार किलोमीटर की यात्रा करके विश्व रिकार्ड भी बनाएंगे. प्रदीप इंदौर से चलकर देश के 29  कश्मीर से कन्याकुमारी तक की साइकिल यात्रा कर रहे है.

प्रदीप सेन के खरगोन पहुंचने पर सेन समाज और समाजसेवा के क्षेत्र से जुडें लोगो ने फूल मालाओं से

स्वागत किया. एक हादसे 4 साल पहले मे ट्रेन की चपेट मे आने के बाद मौत के मुंह से लौटने वाले सेन ने एक पैर पूरा गंवा देने के बाद भी हार नहीं मानी.

प्रदीप का कहना है कि दिव्यांगता मानसिक होती है शारिरीक नही. साइकिल यात्रा के माध्यम से लोगो को संदेश देना चाहते है, दिव्यांगता को अपनी कमजोरी नहीं समझें.

 

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First published: November 27, 2017, 7:13 PM IST
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