सफेद सोने पर जीएसटी का विरोध, व्यापारियों ने सौंपा अरुण जेटली के नाम का ज्ञापन

Ashutosh Purohit | ETV MP/Chhattisgarh
Updated: December 15, 2017, 6:41 PM IST
सफेद सोने पर जीएसटी का विरोध, व्यापारियों ने सौंपा अरुण जेटली के नाम का ज्ञापन
व्यापारियों की हड़ताल से जिले भर की मंडियों में सफेद सोने की खरीदी नही हो सकी

व्यापारियों की हड़ताल से जिले भर की मंडियों में सफेद सोने की खरीदी नही हो सकी

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मध्य प्रदेश के खरगोन मे आज सफेद सोना (कपास) के व्यापार में जीएसटी में शामिल आरसीएम (रिवर्स चार्ज मैकेनिज्म) और परिवहन को ई वे-बिल की श्रेणी में रखे जाने के विरोध में कपास व्यापारी और जिनिंग फैक्ट्री का कारोबार हड़ताल के चलते बंद रहा.

व्यापारियों की हड़ताल से जिले भर की मंडियों में सफेद सोने की खरीदी नही हो सकी, इससे कपास व्यापार पर खासा असर दिखाई दिया. बंद और हडताल की अगुवाई कर रहे मध्यांचल कॉटन जिनिर्स एंड ट्रेड्रर्स एसोसिएशन के मुताबिक निमाड करीब 500 करोड़ का कारोबार प्रभावित हुआ. वही एक हजार करोड रूपये का पूरे प्रदेश मे प्रभावित हुआ है.

शुक्रवार दोपहर में मुख्यालय पर बड़ी संख्या में एकत्रित हुए व्यापारियों ने कलेक्टर अशोक वर्मा को वित्तमंत्री अरुण जेटली के नाम ज्ञापन सौंपा. और चेतावनी दी है की आरसीएम वापस नही लिया गया तो काटन उद्योग बंद कर देगे जिससे किसानों की परेशानी होगी. सफेद सोना कपास उत्पादक किसान की फसल के कम भाव हो जाएंगे.

मध्याचंल कॉटन एसोसिएशन अध्यक्ष मनजीत सिंह चावला ने बताया मध्यांचल कॉटन जिनिर्स एंड टे्रडर्स एसोसिएशन के देशव्यापी आह्वान पर शुक्रवार को जिले में भी कपास व्यापारी एवं जिनर्स हड़ताल पर रहे. एसोसिएशन लंबे समय से शासन के सामने आरसीएम हटाने की मांग करते आ रहा है, लेकिन उनकी इस जायज मांग पर शासन ने ध्यान नही दिया नतीजतन हड़ताल का रुख अख्तियार करना पड़ा.

चावला ने 5 बिंदुओं पर सौंपे गए ज्ञापन में बताया कि आरसीएम कपास खरीदी कीमत पर भुगतान करना है जो व्यापार के लिए कठिन स्थिति है. जिनर्स द्वारा कपास क्रय कर रुई एवं काकडा का निर्माण किया जाता है. इस प्रोसेसिंग में 15 दिन का समय लगता है. जबकि टेक्सटाईल्स मिलों द्वारा रुईं का भुगतान 15 से 25 दिनों में किया जाता है. ऐसी स्थिति में हमें क्रय किमतों पर जीएसटी का भुगतान कार्यशील पूंजी से करना होगा.

उन्होंने कहा कि किसानों को भुगतान तत्काल करने में भी समस्या होगी. करीब 500 करोड़ का कारोबार प्रभावित हुआ है. शासन को व्यापार और किसानों के हित को देखते हुए एसोसिएशन की मांगें मानकर राहत देनी चाहिए. 4.90 प्रतिशत टैक्स जिनर्स को कब और कैसे वापस होगा चावला के अनुसार निर्यात पर 0.10 प्रतिशत का जीएसटी लागू किया गया है. उत्पादन पर गौर करें तो 3.50 करोड़ गठानों रोज बनाई जाती है. इसमें से 20 प्रतिशत निर्यात होता है यानि करीब 70 लाख गठान.

चुंकि अब कपास पर आरसीएम का भुगतान 5 प्रतिात की दर से करना है एवं जिनर्स को रुई निर्यात करने पर 0.10 प्रतिशत ही जीएसटी निर्यातक से मिलेगा याने कि 4.90 प्रतिशत टैक्स जिनर्स को कब और कैसे वापस मिलेगा. इसका कोई कानून में उल्लेख नहीं है.
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इधर किसानों का कहना है की आरसीएम सरकार वापस नही लेगी तो व्यापारी का नही किसान का नूकसान है। किसान को कपास की फसल के भाव कम मिलेंगे.

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First published: December 15, 2017, 6:41 PM IST
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