यहां है 'देवी' इंदिरा गांधी का मंदिर, 31 साल से हर रोज पूजा
Khargone News in Hindi

यहां है 'देवी' इंदिरा गांधी का मंदिर, 31 साल से हर रोज पूजा
इंदिरा गांधी को देवी मानकर प्रतिदिन पूजा-अर्चना होती है

इंदिरा गांधी को देवी मानकर प्रतिदिन पूजा-अर्चना होती है

  • Share this:
मध्य प्रदेश के खरगोन जिले के आदिवासी अंचल के पाडल्या गांव में भारत की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का मंदिर है. यहां आदिवासी इंदिरा गांधी को देवी मानकर प्रतिदिन पूजा-अर्चना करते हैं.

देश की प्रथम महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के निधन के बाद आदिवासी कांग्रेस नेता सुखलाल पटेल ने 31 साल पहले खरगोन के पाडल्या में मंदिर बनवाया था. मंदिर की स्थापना के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री दिवंगत अर्जुन सिंह सहित कई कांग्रेस के दिग्गज नेता पूजन करने पहुंचे थे. आदिवासी आज भी यहां पूजन करते हैं.

खास बात यह है कि मंदिर में हर रोज आरती होती है. शादी समारोह सहित हर खुशी के आयोजन के पहले इंदिरा गांधी के मंदिर में आदिवासी समाज के लोग पूजा अर्चना कर आशीर्वाद लेने आज भी पहुंचते हैं.



जिला मुख्यालय से करीब 80 किमी दूर विकासखंड झिरन्या के पाडल्या गांव सहित आसपास के गांवों में लाखों आदिवासी दिवंगत प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को देवी का रूप मानते हैं. 31 अक्टूबर 1984 को इंदिरा गांधी की हत्या से आदिवासियों को गहरा आघात पहुंचा. तत्कालीन विधायक चिड़ा भाई डाबर और ग्राम प्रधान सुखलाल पटेल की पहल पर गांव में इंदिरा गांधी का मंदिर बना. ये देश में किसी राजनीतिक शख्सियत का पहला मंदिर था.
इसके निर्माण के बाद भाजपाई कोर्ट तक गए थे. फिर भी मध्य प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह और क्षेत्रीय सांसद सुभाष यादव ने 14 अप्रैल 1986 को करीब 50 हजार लोगों की उपस्थिति में इंदिरा मंदिर का लोकार्पण किया. तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी के मंदिर के लोकार्पण को लेकर प्रोग्राम भी तय हो गया था, लेकिन श्रीलंका में बंदूक का कुंदा मारने की घटना के कारण राजीव गांधी नहीं आ सके तो उन्होंने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह को खरगोन भेजा था.

वर्तमान में क्षेत्रीय विधायक आदिवासी नेता झूमा सोलंकी का कहना है कि देश में एक मात्र इंदिरा गांधी का मंदिर है. आदिवासी समाज देवी के रूप मे पूजा अर्चना करता है. उनका कहना है कि इंदिरा जी ने आदिवासियों की जमीन को लेकर कानून बनाया था. जमीन नवाड के पट्टे दिलाकर समाज की मुख्य धारा मे जोड़ने की पहल की थी. आज भी आम आदिवासी इंदिराजी को देवी मानता है. आदिवासी ग्रामीणों का कहना है इंदिरा गांधी हमारी देवी हैं.

पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को आदिवासी नेता ही नहीं माता के रूप में पूजते थे. यही कारण है कि 1986 में मंदिर की नींव के दौरान इंदिरा गांधी की हत्या होने पर दुःखी आदिवासी समाज ने उनका 10-11वां मनाया था. मंदिर बनने के बाद यहां आज भी आदिवासी समाज के लोग किसी कार्यक्रम के शुभारम्भ से पूर्ण इंदिरा गांधी के मंदिर में पूजन कर आशीर्वाद लेते हैं.

पूर्व स्वर्गीय विधायक चिडाभाई डाबर की मंदिर निर्माण में अहम भूमिका रही है. डाबर के पुत्र जिला पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधी केदार डाबर का कहना है कि आदिवासी समाज के उत्थान में इंदिरा गांधी की अहम भूमिका थी. उनका कहना है कि इंदिरा गांधी को आज भी हम देवी मानते हैं और हमारे हर सुख के काम में पूजा अर्चना करते हैं.

जिला कांग्रेस अध्यक्षा का कहना है की इंदिरा गांधी की शहादत के बाद यहां बारवें का कार्यक्रम तक किया गया था. आज भी लोगों में आस्था है. 31 अक्टूबर शहादत दिवस और 19 नवम्बर को जयंती पर भव्य आयोजन किया जाता है.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज