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मध्य प्रदेश: संविधान की शपथ लेकर आदिवासी जोड़े ने किया एक दूसरे का साथ देने का वादा

आदिवासी जोड़े ने शादी के साथ मंडप में संविधान की शपथ भी ली. . (File Pic)
आदिवासी जोड़े ने शादी के साथ मंडप में संविधान की शपथ भी ली. . (File Pic)

आदिवासी समाज के युवक इकराम आरसे और नाइजा ने सादगी से शादी (Marriage) की रस्में पूरी कीं. उन्होंने बाबासाहेब भीमराव आंबेडकर, बिरसा मुंडा और क्रांतिकारी टंट्या मामा को साक्षी मानकर संविधान की शपथ ली.

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खरगौन. मध्य प्रदेश के खरगौन में एक आदिवासी नव दम्पति (Adivasi Couple) ने शादी के दौरान एक दूसरे के साथ जिंदगी की नई पारी शुरू करने से पहले अनोखी रस्म निभाई. उन्होंने शादी के मंडप में संविधान की शपथ लेकर संवैधानिक मर्यादाओं का जीवनभर पालन करने की घोषणा की. यह शादी जिले के भगवानपुरा क्षेत्र के ग्राम ढाबला में देखने को मिली. आदिवासियों की शादियां वैसे भी अपनी खास प्रचीन संस्कृति को लेकर चर्चाओं में रहती हैं. लेकिन इसबार आदिवास जोड़े की शादी कुछ अलग अंदाज में थी. इसमें आदिवासी समाज के युवक इकराम आरसे और नाइजा ने सादगी से शादी की रस्में पूरी कीं.

उन्होंने बाबासाहेब भीमराव आंबेडकर, बिरसा मुंडा और क्रांतिकारी टंट्या मामा को साक्षी मानकर संविधान की शपथ ली. इसके बाद अपने वैवाहिक जीवन की शुरुआत की व हमेशा एक दूसरे की भावनाओं की कद्र करते हुए साथ निभाने की कसम खाई. महापुरुषों के विचारों पर अमल करते हुए दूसरों को भी प्रेरित करेंगे.

परंपरागत तरीके से हुई शादी



बताया गया है कि शादी करने वाल लड़का इकराम पुलिस विभाग में आरक्षक के पद पर पदस्थ है. इकराम ने बताया कि वे शहर में एक वर्ष पहले एक विवाह समारोह में शामिल हुए थे. इस समारोह में उन्होंने युवक-युवती को संविधान की शपथ लेकर वैवाहिक जीवन की शुरूआत करते हुए देखा था. इसके बाद उनके मन में भी यही विचार घर कर गया. इसके बाद उन्होंने भी तय कर लिया कि वह अपने वैवाहिक जीवन की शुरुआत भी संविधान की शपथ लेकर करेंगे. इसके बाद जब शादी तय हुई तो उन्होंने अपनी पत्नी को भी अपनी इच्छा बताई. वह उनके प्रस्ताव पर बहुत खुश दिखीं. उनकी शुक्रवार को उनकी शादी पूरी परंपरागत तरीके से कराई गई.
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शादी के दौरान वर और वधु दोनों ही पक्षों ने संविधान की शपथ का स्वागत किया. उन्होंने कहा कि भारत का संविधान सबसे अच्छा माना जाता है. यह हमें कानूनी अधिकार देता है. आदिवासी युवक इकराम के परिजनों ने बताया कि उसने अपनी शादी में संविधान की शपथ लेने के आयोजन की बात कही थी. अच्छी सोच को समाजजनों ने सम्मान देते हुए उनकी इच्छा के अनुरूप विवाह संपन्न कराया. इस शादी की पूरे जिले में चर्चा है. खासकर दलित और आदिवासी समाज के लोगों ने इसकी खुलकर तारीफ की है.
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