मुस्लिम महिला की मोदी से गुहार, बंद करें तीन तलाक के नाम पर अत्याचार
Khargone News in Hindi

तीन तलाक का दंश झेल रही मुस्लिम महिला ने पीएम मोदी से इस पर तुरंत रोक लगाने की मांग की है. ये महिला मध्य प्रदेश के खरगौन जिले की हैं जहां सिर्फ एक मोहल्ले में 23 महिलाएं तीन तलाक के बाद न्याय की मांग कर रही हैं.

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तीन तलाक का दंश झेल रही मुस्लिम महिला ने पीएम मोदी से इस पर तुरंत रोक लगाने की मांग की है. ये महिला मध्य प्रदेश के खरगौन जिले की हैं जहां सिर्फ एक मोहल्ले में 23 महिलाएं तीन तलाक के बाद न्याय की मांग कर रही हैं.

तलाक! तलाक! तलाक! इन तीन शब्दों से कोई सारी जिम्मेदारियों से आजाद हो गया, तो किसी के हिस्से में आया जिंदगी भर का दर्द. छोटी सी बात पर हुए झगड़े, पति-पत्नी के बीच होने वाली कहासुनी और पारिवारिक विवाद की वजह से हजारों महिलाएं 'तीन तलाक' का दंश झेल रही हैं.

तीन तलाक पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई और देशभर में छिड़ी बहस के बीच प्रदेश18 आपको एक ऐसी बस्ती में लेकर चल रहा है, जहां हर कदम पर 'तीन तलाक' का दर्द महसूस किया जा सकता है.



मध्य प्रदेश के खरगोन जिले के महेश्वर कस्बे का कुरैशी मोहल्ला पहली नजर में देश के किसी भी आम मोहल्ले की तरह ही नजर आता है. करीब 100 परिवारों की इस बस्ती में 23 तलाकशुदा महिलाएं रहती हैं.
महज 20 से 30 की उम्र में तलाक का अभिशाप झेल रही इन महिलाओं के लिए जिंदगी का हर एक पल किसी चुनौती से कम नहीं है. मासूम बच्चों की परवरिश और खुद के लिए दो वक्त की रोटी की जुगाड़ करना यहां की महिलाओं के लिए मुश्किल मंजिल को फतह करने जैसा होता है.

'तीन तलाक' पीड़ित महिलाओं की आवाज बनी नसरीन

कुरैशी मोहल्ले में ही रहने वाली नसरीन का निकाह दो साल पहले बड़वानी जिले के अबरार खान से हुआ था. नयी जिंदगी शुरू करने के हसीन सपने देख रही नसरीन को पता ही नहीं चला कि शौहर ने कब तलाक दे दिया. नसरीन को रिश्तेदारों और पड़ोसियों से इस बात की जानकारी मिली.

आंखों में आंसू लिए नसरीन बताती है कि वह अपनी फरियाद लेकर मौलवी साहब और आलमी साहब के पास भी गई. लेकिन उन्होंने यह कहकर तलाक को जायज बता दिया कि, तलाक का ख्याल भी शौहर के मन में आए तो वो शरीयत के अनुसार तलाक है.

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जिंदगी में 'तीन तलाक' से लगे ब्रेक के बाद नसरीन अपने मायके में चरखा चलाकर जिंदगी की गाड़ी को पटरी पर लाने की कोशिश कर रही है. साथ ही वह उन महिलाओं की आवाज भी बन गई है, जिनकी जिंदगी 'तीन तलाक' की वजह से नासूर बन चुकी है.

नसरीन का मानना है कि, तलाक के तीन शब्द पर प्रतिबंध लगना चाहिए और कानून में जो सजा रेप करने वाले गुनाहगार को दी जाती है वो ही सजा तलाक देने वालों को भी मिलना चाहिए.

एक फैसला और लड़की की जिंदगी बर्बाद

नसरीन के घर के ही करीब रहने वाली बिल्किस की कहानी भी इससे जुदा नहीं है. शादी के कुछ महीने बाद ही अचानक तीन बार 'तलाक' और बिल्किस की जिंदगी में कभी न खत्म होने वाला अंधियारा छा गया. वो कहती हैं, 'तलाक से लड़की की जिंदगी बर्बाद हो जाती है. लड़कों को कोई फर्क नहीं पड़ता. कम से कम तलाकशुदा मर्द के दोबारा निकाह पर प्रतिबंध लगना चाहिए.'

गुजारे भत्ते के नाम पर सिर्फ 1400 रुपए

निखत भी मोहल्ले की उन कम उम्र की महिलाओं में शामिल हैं, जिनकी जिंदगी एक झटके में 'तीन तलाक' से बेनूर हो गई. निखत के तलाक को छह साल हो गए, लेकिन उस दिन को याद कर अब भी उसकी आंखों में आंसू आ जाते हैं.

निखत कहती हैं, पति शब्बीर मंसूरी से गुजारे भत्ते के नाम पर 1400 रुपए मिलते हैं. इस राशि में अपना और बेटे का खर्च चलाना संभव नहीं. अपनी बेबसी जाहिर करते हुए वह कहती हैं, यदि पिता का साथ नहीं मिलता तो न जाने उसका क्या होता.

माता पिता से नहीं देखा जाता बेटियों का दर्द

कुरैशी मोहल्ले में रहने वाले कई बुजुर्गवार लोग जिंदगी के सांझ में काम करने के लिए मजबूर हैं. यदि वह ऐसा नहीं करेंगे तो बेटी और उनके मासूम बच्चों के लिए दो वक्त की रोटी का इंतजाम नहीं हो सकेगा.

ये सभी कहते हैं कि ऐसे मामलों में सख्ती की जरूरत है. कोई कैसे बस 'तीन तलाक' कहकर किसी की जिंदगी बर्बाद कर सकता है.

एक ऐसी ही तलाकशुदा बेटी के पिता मंसूरी कहते हैं, हमारी बेटी की जिंदगी नरक हो गई है.

यह केवल किसी एक पिता का दर्द नहीं है, कुरैशी मोहल्ले की हर दीवार पर 'तीन तलाक' की वजह से बर्बादी और बेबसी की इबारत को आसानी से पढ़ा जा सकता हैं.
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