बिरला ग्रुप की मिल सेंचुरी यार्न और सेंचुरी डेनिम के बिकने से कामगारों में आक्रोश

मिल के बाहर प्रदर्शन करते कामगार.

मिल के बाहर प्रदर्शन करते कामगार.

मध्य प्रदेश के खरगोन जिले के सत्राटी स्थित घाटे में चल रही बिरला ग्रुप की मिल सेंचुरी यार्न और सेंचुरी डेनिम के बिकने से कामगारों में आक्रोश है. बिरला ग्रुप द्वारा मिल को वेरिट ग्रोवल को बेचने का कामगार लगातार विरोध कर रहे हैं.

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मध्य प्रदेश के खरगोन जिले के सत्राटी स्थित घाटे में चल रही बिरला ग्रुप की मिल सेंचुरी यार्न और सेंचुरी डेनिम के बिकने से कामगारों में आक्रोश है. बिरला ग्रुप द्वारा मिल को वेरिट ग्रोवल को बेचने का कामगार लगातार विरोध कर रहे हैं.



हालात ये हो गये हैं कि पुलिस के साये में मिल चल रही है. श्रमिकों का आरोप है कि सेंचुरी मिल को बेचने के पीछे कोई बड़ा षड्यंत्र है. मिल प्रबंधन मजदूरों के भविष्य से खिलवाड़ कर रहा है.



बीआरएस या बीएसएस की मांग कर रहे श्रमिकों का आरोप है कि मिल हस्तांतरण की डीड या लेखा जोखा कामगारों को नहीं बताया जा रहा है. प्रशासन और श्रम विभाग कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है. कम्पनी प्रबंधन पर दो हजार से अधिक मजदूरों के साथ धोखाधड़ी के आरोप लगा रहे हैं.





मजदूरों के आरोप हैं कि बिरला ग्रुप कम्पनी ने अपने लाभ के लिए मजदूरों का अहित किया है. मजदूरों का कहना है कि जब बिरला ग्रुप को कम्पनी बेचनी ही थी तो पहले मजदूरों को बीआरएस की राशि दे देना था. प्रति मजदूर 20 लाख से अधिक की राशि बनती है. मिल को 2 हजार मजदूरों को बीआएस की राशि करोड़ों में देना पड़ती इसलिये ऐसी कंपनी को मिल बेच दी जो खुद की वेरिट कम्पनी के मजदूरों को दो से तीन माह की तनख्वाह नहीं दे पा रही है.
मजदूरों का सीधा आरोप है कि बिरला ग्रुप ने मजदूरों के हक पर डाका डाला है. आज हम नए ग्रुप में जुड़कर काम करते हैं और कल को कम्पनी बन्द या दिवालिया होती है तो मजदूरों को कुछ नहीं मिलेगा. हालांकि लगातार नारेबाजी और कामगारों के आक्रोश के चलते श्रम विभाग के संभागीय कार्यालय में सोमवार को फैक्ट्री प्रबंधन और मजदूर यूनियनों में बैठक होने जा रही है.



 
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