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मध्‍य प्रदेश: प्रतिबंधित दवा बेचने वाली 6 दवा कंपनियों पर लगा 3 माह का प्रतिबंध
Bhopal News in Hindi

Puja Mathur | News18 Madhya Pradesh
Updated: February 16, 2020, 4:23 PM IST
मध्‍य प्रदेश: प्रतिबंधित दवा बेचने वाली 6 दवा कंपनियों पर लगा 3 माह का प्रतिबंध
मध्‍य प्रदेश में प्रतिबंधति दवाओं की खरीदफरोख्‍त को पूरी तरह से रोकने का प्रयास जारी है.

‘शुद्ध के लिए युद्ध’ अभियान (war for pure campaign) में अब राज्य सरकार ने प्रतिबंधित और नकली दवा (banned drugs) बेचने और उसका स्टाक करने वालों के खिलाफ अभियान शुरु कर दिया है.

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भोपाल (Bhopal) : प्रतिबंधित दवाओं (banned drugs) की खरीदफरोख्‍त करने वालों के खिलाफ मध्‍य प्रदेश सरकार (Madhya Pradesh Government) ने ‘शुद्ध के लिए युद्ध’ अभियान (war for pure campaign) की शुरूआत की है. अभियान के तहत, सूबे का स्‍वास्‍थ्‍य विभाग प्रतिबंधित दवाओं की खरीद-फरोख्‍त करने वालों की धरपकड़ में जुट गया है. एक्‍शन प्‍लान के तहत, विभागीय अधिकारी चरणबद्ध तरीके से ड्रग माफियाओं पर कार्यवाही कर रहे है. अ‍ब तक की कार्रवाई में सूबे की छह दवा कंपनियों पर 3 माह का प्रतिबंध लगाया जा चुका है.

स्वास्थ्य विभाग की रडार पर दवा माफिया
शुद्ध के लिए युद्ध अभियान में अब कमलनाथ सरकार का डंडा नकली दवा कारोबार पर चलने को तैयार है. सरकार ने प्रतिबंधित और नकली दवा का कारोबार करने वालों पर सख्ती की तैयारी कर ली है. इसकी शुरुआत में सरकार ने छह दवा कंपनियों पर एक्शन लेते हुए तीन महीने का प्रतिबंध लगा दिया है. सरकार ने अब बड़ी कंपनियों के खिलाफ एक्शन कर कार्यवाही करने का मूड बनाया है, जो मरीजों को प्रतिबंधित दवाएं बेच रही है या फिर उसका स्टाक कर रखे है.

इन कंपनियों पर हुई कार्रवाई



वडोदरा गुजरात की भारत पेरेन्ट्रल दवा कंपनी ने सेफेड्रोक्सिल टैबलेट 500 (एमजी) और कैल्शियम ग्लूकोनेट 10 मिग्रा. के ज्यादा रेट कोट किये. जेस्ट फार्मा इंदौर ने आइबूप्रोटेन टैबलेट(200 मिग्रा), टैरेल फार्मास्यूटिकल कांगडा हिमाचल प्रदेश ने सिल्वर सल्फेडाइजिन 500 ग्राम जार, अल्पा लैबोरेटरी इंदौर सिप्रो फ्लोक्सासिन 5 आई ड्रॉप, हीलर्स लैब लखनऊ मॉक्सी फ्लोक्सासिन टैबलेट (400 मिग्रा),नैन्ज मेडसाइंस फार्म सिरमौर हिमाचल प्रदेश ने सिल्वर सल्फाडाईजिन 500 के रेट डीपीसीओ से निर्धारित दरों से ज्यादा कोट किये. मप्र पब्लिक हेल्थ कॉर्पोरेशन के अधिकारियों ने इस गड़बड़ी को पकडने के बाद कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई कर जुर्माना लगाया है.

तीन दवाओं के सेंपल जांच में फेल, प्रोडक्ट तीन साल के लिए ब्लैकलिस्टेड
अस्पतालों में इलाज के लिए उपयोग की जाने वाली दवाओं, इंजेक्शन सहित अन्य मटेरियल को औषधि प्रयोगशालाओं में टेस्ट कराया जाता है. देवास जिले के सीएमएचओ ने कंपनियों की सप्लाई की गई तीन दवाओं की जांच शासकीय विश्लेषक केन्द्रीय औषधि परीक्षण प्रयोगशाला मुंबई में कराई. जिसके बाद दवाओं के बैच अमानक मिले. इसके बाद तीनों प्रोडक्ट को तीन साल के लिए ब्लैकलिस्टेड कर कंपनियों को बैच की राशि कॉर्पोरेशन को डीडी के माध्यम से जमा करने के आदेश दिए गए हैं. इन कंपनियों में नेस्टॉर फार्मास्यूटिकल लिमिटेड फरीदाबाद से सप्लाई की गई सिप्रोफ्लॉक्सासिन टैबलेट(250मिग्रा)के बैच अमानक पाये जाने पर 2 लाख 24 हजार 478 रूपये का ड्राफ्ट जमा करने के आदेश दिये हैं.इसके साथ ही हेलवुड लैबोरेटरीज प्रा.लि. अहमदाबाद की ओर से भेजी गई दो दवाओं के बैच जांच में फेल होने पर 2 लाख 16 हजार 169 रूपये जमा कराने के आदेश दिए हैं.

 

क्लालिटी-कीमत की होगी परख
सरकारी अस्पतालों में सप्लाई होने वाली दवाओं में कंपनियों की गडबडियों को भी अब सरकार ने गंभीरता से लेना शुरु कर दिया है.स्टेट हेल्थ कॉर्पोरेशन ने इस तरह की गड़बड़ियों को पकड़ा है. 6 दवा कंपनियों ने ड्रग प्राइज कंट्रोल ऑर्डर की निर्धारित दरों से ज्यादा रेट कोट करने पर 3 महीने का प्रतिबंध लगाया गया है.ये दवा कंपनियां अब अगले 3 महीनों तक हेल्थ कॉर्पोरेशन के किसी भी टेंडर प्रक्रिया में भाग नहीं ले सकेंगी.इसके अलावा दो दवाओं के सेंपल जांच में फेल होने के बाद प्रोडक्ट दो साल के लिए ब्लैकलिस्टेड किये गए हैं.बहरहाल स्वास्त्य मंत्री तुलसी सिलावट की माने तो अब विभाग सरकारी समेत बाजार में मिलने वाली दवाओं की क्वालिटी से लेकर उसकी कीमत को परखने के लिए टीमों को लगाया है और यदि सरकार की ये मुहिम असरदार होती है तो उपभोक्ता को घटिया क्वालिटी और ऊंची कीमत वाली दवा से मुक्ति मिल सकेगी.

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First published: February 16, 2020, 4:21 PM IST
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